सर्दी और फ्लू के बारे में मिथक
आज यहाँ पर हम सर्दी और फ्लू के बारे में नियमित रूप से सुनाई देने वाले मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में चर्चा करेंगें । यह समझने के लिए कि क्या सच है, और क्या गलत है!
1. मिथक -फ्लू होने से भारी सर्दी होती है
गलत: हालांकि यह व्यापक रूप से स्वीकार्य तथ्य है कि सर्दी और फ्लू के लक्षण, जैसे खांसी, अवरुद्ध नाक या सिरदर्द समान दिखते हैं, परन्तु वे पूरी तरह से दो अलग-अलग बीमारियाँ हैं। कुछ उपचार सर्दी और फ्लू के दोनों स्थितियों के लिए उपयुक्त होते हैं क्योंकि वे आपको उन्हीं लक्षणों से राहत दिलाते हैं, जो सर्दी या फ्लू में सामान रूप से दिखाई देते हो। लेकिन, आम तौर पर फ्लू के लक्षण हमेशा अधिक गंभीर होते हैं और वे लंबे समय तक चलते हैं। फ्लू का कारण बनने वाले वायरस सर्दी के कारण ही होते हैं, यही कारण है कि शरीर के तापमान में अचानक वृद्धि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।आपको बुखार आम तौर पर जुकाम के साथ होता है।
दुर्लभ मामलों में, फ्लू बहुत ही युवा और बुजुर्ग आयु वर्ग में जटिलताओं का कारण बन सकता है। हालांकि, अधिकांश लोगों के लिए, फ्लू के बारे में चिंतित होने के लिए कुछ भी नहीं है और आपको कुछ दिनों के भीतर बेहतर महसूस होने लगता है ।
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मिथक -एंटीबायोटिक्स द्वारा फ्लू का इलाज किया जा सकता है
गलत: केवल जीवाणु संक्रमण के मामले में ही एंटीबायोटिक्स उपयोगी होते हैं। जबकि , सर्दी और फ्लू वायरस के कारण होते हैं, इसलिए एंटीबायोटिक्स बिलकुल ही कारगर नहीं होते हैं।
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मिथक - फिट और स्वस्थ लोगों को सर्दी और फ्लू नहीं होता।
गलत: सर्दी या फ्लू वायरस की वजह से किसी भी युवा या वृद्ध, फिट या स्वस्थ आदमी भी बीमार पड़ सकता है। हम सभी के पास वायरस को अवरोधित करने की क्षमता होती है। लेकिन तथ्य यह है कि फ्लू वायरस से संक्रमित होने पर कुछ स्थितियों जैसे मधुमेह या हृदय रोग होने से इसके इलाज में जटिलता के साथ खतरा हो सकता है। इसलिए, यदि आपको लगता है कि आपको सर्दी और फ्लू होने जा रहे हैं तो आपको आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए और इसे ऊतकों में खांसी और छींकने से किसी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, और उनका यथाशीघ्र इलाज करना चाहिए।
4. मिथक -यदि आप ठण्ड में भीग जाते हैं तो आपको सर्दी या फ्लू हो जायेगा -
गलत: ठंड होने के परिणामस्वरूप आपको सर्दी हो जायेगी ऐसा बिलकुल भी नहीं है। हालांकि यदि आपका शरीर ठंडा और गीला हो जाता है, तो यह आपके शरीर को सर्दी और फ्लू वायरस विकसित करने के लिए अतिसंवेदनशील बना सकता है। ऐसी स्थिति में, वायरस का हमला बढ़ सकता है, जिससे फ्लू या सर्दी के लक्षण हो सकते हैं। तो, सर्दियों के दौरान स्वयं को गर्म कपड़ों में लपेटना और गीले होने पर खुद को सूखा रखना एक प्रमुख वायरस को सक्रिय होने से रोक सकता है।
5.मिथक - केवल एक संक्रमित व्यक्ति के साथ एक ही हवा में सांस लेने के कारण आपको सर्दी या फ्लू हो सकते हैं
गलत: यह निश्चित रूप से एक सच है कि सर्दी और फ्लू वायरस हवा के माध्यम से यात्रा करते हैं। इसलिए, जब भी कोई व्यक्ति संक्रमित होता है तो ये वायरस छींकने या खांसी के साथ आप तक पहुँच सकते हैं, जिससे आपके संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है। हालांकि, ये वायरस न केवल हवा के माध्यम से फैलते हैं, बल्कि संक्रमित व्यक्ति या वस्तु के संपर्क में आने से भी वायरस आपके हाथों द्वारा स्थानांतरित हो सकता है। उदाहरण के लिए संक्रमित सतहें टेलीफोन, दरवाजे, कंप्यूटर कीबोर्ड या बच्चे के खिलौने के हैंडल हो सकती हैं। एक कठिन सतह पर, एक फ्लू वायरस 24 घंटों तक जीवित रह सकता है। एक बार आपके हाथों पर, जब भी आप अपनी आंखें रगड़ते हैं, या अपनी नाक या मुंह को छूते हैं तो यह आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए आपको यह सलाह है कि यदि आपके पास ठंडा या फ्लू है, या यदि आप ऐसे माहौल में हैं जहां कोई और संक्रमण की संभावना है तो आप अपने हाथों को अच्छी तरह से और नियमित रूप से धोना चाहिए।
Posted by D.R. Singh on Friday 25 January 2019
वर्कआउट छोड़ने के बाद शुरू हो जाता है मसल्स का कम होना
जिंदगी की स्पीड बदलते समय के साथ कुछ ज्यादा ही तेज हो गई है। यूं तो मैनेजमेंट के सैकड़ों कोर्स आ गए हैं, लेकिन खुद का लाइफस्टाइल मैनेज करना और एक्सरसाइज के लिये समय निकालना बेहद मुश्किल हो गया है। अकसर एक्सरसाइज शुरू तो हो जाती है, लेकिन हफ्ता, दस दिन में ही छूट भी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एकदम से एक्सरसाइज छोड़ देने पर शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जिनमें से मसल्स का कम होना भी एक है। चलिये आज जानते हैं कि वर्कआउट छोड़ देने के बाद कब से मसल्स का कम होना शुरू हो जाता है।
कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी का शोध
जर्नल ऑफ़ रिहैबिलिटेशन मेडिसिन में छपा एक शोध कहता है कि अगर आप अपना नियमित वर्कआउट बीच में छोड़ देते हैं तो आप अपनी शक्ति का एक तिहाई खो देते हैं। कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 32 पुरुषों को (जिनमें से 17, 20 साल की उम्र के और बाकी 15 60 से 70 साल की उम्र के) एक 'नी ब्रेस' पहनने के लिये कहा, जोकि 2 सप्ताह के लिए एक पैर को स्थिर कर देता है। पहले 2 हफ्तों के बाद युवा पुरुषों में 'नी ब्रेस' वाले पैर ने 22 से 34 प्रतिशत मांसपेशियों की ताकत खो दी। वहीं बड़ी उम्र वाले पुरुषों में ये 20 से 26 प्रतिशत कम रहा।
स्ट्रेंथ में आई इस कमी को पूरा करने के लिये 6 हफ्तों के लिये साइकलिंग शुरू की, जिसमें से पहले 4 हफ्ते उन्होंने 3 बार साइकलिंग की और अखिर के 2 हफ्तों में 4 बार। 6 हफ्तों की साइकलिंग के बाद उन्होंने पहले जितना मसल मास पा लिया लेकिन उनके पैर की शक्ति पहले से अभी भी 5 से 10 प्रतिशत कम ही थी।
जल्दी थकान होने लगती है
इसका एक सीधा सा संकेत यह भी है कि जिम जाना छोड़ने के दो हफ्तों बाद से ही कुछ सीड़ियां चढ़ने भर से ही सांस फूलने लगती है। एक्सरसाइज फिजियोलॉजिस्ट 'स्टेसी सिम्स' के मुताबिक आपका VO2 (फिटनेस का एक ऐसा माप जिससे मांसपेशियों द्वारा उपयोग की जा रही ऑक्सीजन का आंकलन किया जाता है) 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। ऐसा माइटोकॉन्ड्रिया में कमी आने की वजह से होता है। हालांकि इन माइटोकॉन्ड्रिया का पुनर्निर्माण किया जा सकता है, लेकिन यह कम होने में लगे समय की तुलना में पुनर्निर्माण होने में कहीं अधिक समय लगता है।
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इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।
Posted by D.R. Singh on Monday 31 December 2018
क्या आप जानते हैं ? मोटापा कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में पांच साल से कम आयु के करीब दो करोड़ 20 लाख बच्चे अपने वजन से अधिक पाए गए,जो कि विश्व के भविष्य के लिए खतरा है।विश्व स्वास्थ्य संगठनका मानना है कि समाज में तेजी से आ रहे बदलाव के कारण बचपन में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों में मोटापा बढने का सीधा संबंध खानपान में स्वास्थ्यवर्धक भोजन की कमी और शारीरिक गतिविधियों के स्तर में कमी आना है लेकिन इसका प्रभाव अन्य गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
मोटापे के कारण बच्चों और लोगों में आत्मविश्वास में कमी, चिंता, डिप्रेशन, ईटिंग डिस्ऑर्डर, अकेलापन, डायबिटीज, पॉलिसिस्टिक ओवरी, हाइपोगोनैडिस्म, हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, स्लीप एपेनिया, अस्थमा, एक्सरसाइज इंटोल्रेंस,गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल बीमारी, कब्ज, लीवर पर फैट्स जमना फ्लैट फीट इत्यादि बीमारियां प्रमुख रूप से उभर कर आ रही हैं।
इन आंकड़ों और तथ्यों से साबित हो चुका है कि मोटापा सचमुच देश के लिए और समाज के लिए आने वाले समय में बड़ा खतरा बन सकता है। इसको रोकने के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली में परिवर्तन कर व्यायाम और शारीरिक सक्रियता को अपने जीवन में शामिल करना बेहद जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके लिए पूरी दुनिया की सभ्यता के तेजी से पश्चिमीकरण को जिम्मेदार ठहराते हुए मोटापे को वैश्विक महामारी की संज्ञा दी है। इंग्लैंड में हुए अध्ययनों से जाहिर है कि नए दौर की जीवनशैली मोटापे का सबसे बड़ा कारण है। आपाधापी के इस दौर में शारीरिक श्रम लगातार घटता जा रहा है। बीस साल पहले तक इंग्लैंड का एक आम आदमी एक साल में 255 मील पैदल चलता था, जबकि अब यह दूरी घटकर 189 मील रह गई है। साइकिल चलाने के स्तर में पिछले 50 वर्षो में वहां 80 प्रतिशत की कमी आई। स्कूल जाने के लिए तो अब एक फीसदी से कम बच्चे साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। स्कूली बच्चों में वहां मोटापा बढ़ने के जो कारण गिनाए जा रहे हैं उनमें भोजन का अस्वास्थ्यकर होना, जंक फूड के आक्रामक विज्ञापन अभियान और कंप्यूटर गेम प्रमुख हैं। ध्यान रहे, भारत के बच्चे भी अब इन कारणों से अछूते नहीं रह गए हैं।
इसके अलावा मोटापा बढ़ने का एक कारण आनुवंशिकता भी है। नई खोजों से पता चला है कि कुछ लोग आनुवंशिक रूप से मोटे होने के लिए मजबूर होते हैं। एक खास जीन मोटापा बढ़ने का कारण बन सकता है। जीएडी टू नामक यह जीन कुछ ऐसे रसायनों का उत्पादन बड़ी तेजी से करता है, जिनके कारण भूख बहुत अधिक लगती है। भूख लगने पर हर शख्स खाने की ओर दौड़ता है और यही मोटापे की वजह बन जाती है।
फिलहाल विश्व में 250 मिलियन लोग मोटापे के शिकार हैं और सामान्य से अधिक वजन वालों की संख्या तो इससे भी अधिक है। अमेरिका में हर साल तीन लाख लोगों की मृत्यु केवल मोटापे के कारण होती है। मोटापे के चलते होने वाली बीमारियों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बता रहा है। इस खतरे से निबटने के लिए वह पक्के इंतजाम करना चाहता है और इसी के तहत दुनिया के कई देशों में अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए यह लक्ष्य तय किया गया है कि सन 2010 तक ऐसे लोगों की संख्या में भारी वृद्धि करनी है जो प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे शारीरिक श्रम करें। इंग्लैंड और फ्रांस में भी ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और यह सब मोटापे को नियंत्रित करने के लिए ही है।
तेज़ी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहे देशों में पिछले कुछ दशकों में प्रति व्यक्ति आय दर से भी ज़्यादा तेज़ी से मोटापे के शिकार लोगों की गिनती बढ़ रही है। एक अनुमान के हिसाब से चीन में 10 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं। वहीं ब्राज़ील में बड़ों के मुकाबले बच्चे ज़्यादा तेज़ी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक ब्राज़ील में 5 से 9 साल तक की आयु के 16 प्रतिशत लड़के और 12 प्रतिशत लड़कियां मोटापे का शिकार हैं। अमरीका की तरह ही मौक्सिको में हर सात में से एक व्यक्ति मोटापे का शिकार है। भारत का भी कुछ ऐसा ही हाल है।
देखिये इस समस्या से निजात पाने का कोई सीधा सा जवाब नहीं है, लेकिन हां विश्वस्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही इस समस्या के लिए की मायनों में सामाजिक सुधार की ज़रूरत है। जिसमें मोटापे की इस समस्या के खिलाफ़ न सिर्फ स्वस्थ्य से संबंधित कदम उठाने होंगे, बल्कि इसके प्रति जुड़ी शर्म की हीन भावना को मिटाते हुए मनोवैज्ञानिक तौर पर भी इसका इलाज करना होगा।
Posted by D.R. Singh on Wednesday 26 December 2018
एक सामान्य व्यक्ति को प्रति दिन कितनी कैलोरी की ज़रूरत होती है?
कैलोरी क्या हैं?
कैलोरी ऊर्जा की एक इकाई है जिसका उपयोग भोजन में संग्रहीत ऊर्जा की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। भोजन में कैलोरी ऊर्जा की वह मात्रा है जो एक 1 किलोग्राम पानी का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा है, जिसे किलोकैलोरी कहते है।
एक ग्राम जल का ताप 1 °C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को 1 कैलोरी कहा जाता है। कैलोरी खाने और पीने के माध्यम से ऊर्जा की खपत को प्रस्तुत करती है, और शारीरिक गतिविधि के लिए इसी ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
1 कैलोरी = 4.186 जूल
1 किलो कैलोरी = 1000 कैलोरी = 4186 जूल
शरीर के लिए कैलोरी का क्या महत्त्वहै :
मानव शरीर को जीवित रहने के लिए कैलोरी की आवश्यकता होती है – शारीरिक गतिविधि के लिए, सांस लेने, रक्त प्रवाह और ह्रदय को पंप करने के लिए, और शरीर की वृद्धि के लिए, लगने वाली उर्जा मानव शरीर भोजन से प्राप्त करता है, खाद्य पदार्थों में कैलोरी की संख्या, कैलोरी के तीन मुख्य घटक पर निर्भर करती है।
कार्बोहाइड्रेट के एक ग्राम में 4 कैलोरी होती है
प्रोटीन के एक ग्राम में 4 कैलोरी होती हैं
वसा के एक ग्राम में 9 कैलोरी होती है
243 ग्राम के कच्चे अंडे में 348 कैलोरी होती हैं, जिनमें से 216 वसा से आती है , प्रोटीन से 124 और कार्बोहाइड्रेट से 8 कैलोरी आती हैं। अर्थात इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं
243 ग्राम के कच्चे अंडे में वसा 24 ग्राम , प्रोटीन 31 ग्राम और कार्बोहाइड्रेट 2 ग्राम होता है इसकी गड़ना हम इस प्रकार करते हैं
वसा 24 ग्राम
24 x 9 = 216 कैलोरी
प्रोटीन 31 ग्राम
31 x 4 = 124 कैलोरी
कार्बोहाइड्रेट 2 ग्राम
2 x 4 = 8 कैलोरी
सभी भोज्य पदार्थ इन तीन ब्लॉकों का एक संयोजन होता है। भोजन में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन भोजन में शामिल कैलोरी, या ऊर्जा को दर्शाती हैं।
एक सामान्य व्यक्ति को प्रति दिन कितनी कैलोरी की ज़रूरत पड़ती है?
प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक दिन अधिक या कम कैलोरी की आवश्यकता हो सकती है। कैलोरी कीखपत हमारे सामान्य स्वास्थ्य, शारीरिक गतिविधि की मांग, लिंग, वजन, ऊंचाई और आकार सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। गृहिणी के अपेक्षा एक खिलाडी को हर दिन अधिक कैलोरी की जरूरत होती है । औसत व्यक्ति को प्रति दिन 2,500 कैलोरी और औसत महिला को प्रति दिन2,000 कैलोरी की आवश्यकता होती है। औसत वयस्क व्यक्ति को प्रति दिन 1,800 कैलोरी से कम नहीं लेना चाहिए।
बी एम् आई जानें
Posted by D.R. Singh on Friday 14 December 2018
अपने स्वास्थ्य को प्रबंधित करने का एक आसान तरीका
अपने स्वास्थ्य को प्रबंधित करने के लिए विवरण के बजाय विषयों पर ध्यान केंद्रित करें।दूसरे शब्दों में, अपने स्वास्थ्य को
सूक्ष्म-प्रबंधित न करें।
इसके बजाए, वृहद मुद्दों (macro-issues) के बारे में सोचें जो आपके समग्र स्वास्थ्य पर सबसे अधिक प्रभाव डाल सकते हैं।
मिसाल के तौर पर, यह पता लगाने की बजाय कि खाने के लिए वास्तव में क्या खाना चाहिए और उसका पौष्टिक मूल्य क्या
होना चाहिए, क्यों न हम सामान्य रूप से कम भोजन खाने पर ध्यान केंद्रित करें?
एक और उदाहरण:एकदम सही व्यायाम कार्यक्रम अपनाने की कोशिश करने के बजाय, (जिसे सीखने और कार्यान्वित करने
में काफी समय लगे और जब आप उसे बंद करें तो निराशा का स्रोत बनें), क्यों न मूलभूत सिद्धांतो के साथ बने रहें? वैसे भी
मूलभूत सिद्धांतो के साथ बने रहने से 80% परिणाम मिलता है। शेष 20% को त्यागने के बारे में सावधानी रखें।
मैक्रो-थीम की एक सूची हम यहां पर दे रहे हैं जो मुझे लगता है कि समग्र स्वास्थ्य और अच्छी तंदुरुस्ती के लिए अच्छे
परिणाम देंगें
1 - भूखे लगने पर ही खाना खाएं, और 80% पेट भरने पर खाना बंद करें । इसके अलावा, अपने आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं।
2 - हाइड्रेटेड बने रहें अर्थात पानी का सेवन अधिक करें।
3 - रात में लगातार 8-10 घंटे की नींद लें । बिस्तर पर जल्दी चले जाना चाहिए ।
4 - सामान्य रूप से व्यायाम करें, सप्ताह में कम से कम तीन बार। ऐसा कुछ चुनें जिसे आप पसंद करते हैं।
5 - प्रति दिन कम से कम 30 मिनट अच्छी किताब पढ़ने में व्यतीत करें और उस पर प्रतिबिंबित करें कि आप उससे क्या सीख रहे हैं।यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
6 - जो कुछ मिला है उसके लिए हर दिन आभारी रहें, इससे तनाव कम होता है।
7 - सबके साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करें टकराव से तनाव पैदा होता है।
मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही सरल सूत्र है।लेकिन यह सभी प्रकार के समय लेने वाले और निराशाजनक विवरणों में फंसने से
बेहतर है। हालांकि अच्छे स्वास्थ्य के लिए कोई सही सूत्र नहीं है, फिर भी मुझे लगता है कि हम इस तरह के कुछ प्रमुख विषयों पर
ध्यान केंद्रित करके हमारे रास्ते में आने वाली बाधाओं से निजात पा सकते हैं।
Posted by D.R. Singh on Wednesday 3 October 2018

