
आहार विशेषज्ञ प्रिया कठपाल के अनुसार, नाशपाती के सबसे ज्यादा फायदे उसके छिलके से ही मिलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके छिलकों में इसके गूदे से 3-4 गुना अधिक फाइटोन्यूट्रेंट्स (phytonutrients) पाया जाता है। ये तत्व इम्यूनिटी को बढ़ाता है। रिसर्च में ये बात सामने आई है कि इससे कैंसर और दिल की बीमारियों का जोखिम कम होता है।
एक नाशपाती में इतना फाइबर होता है कि आपकी दिन की फाइबर की 24% सिर्फ इसे खाकर पूरी हो जाती है। नाशपाती हमारी पाचन क्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें मौजूद फाइबर न सिर्फ हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है बल्कि एक शोध के मुताबिक, ये कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम करता है जिससे कि दिल की बीमारियों व टाइप 2 डायबिटीज़ का जोखिम कम होता है।
अगर आपको भूख महसूस हो रही है तो एक रसीला सी नाशपाती खा लें। इसका फाइबर आपको काफी देर तक के लिए पेट भरा हुआ महसूस करवाएगा। फाइबर के अलावा इसमें विटामिन सी, आयरन और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है।
बहुत से लोगों को उनकी किसी बीमारी की वजह से कुछ फल खाने की मनाही होती है। लेकिन नाशपाती एक ऐसा फल है जिसे हर कोई खा सकता है। इसे शिशु को प्यूरी बनाकर भी दिया जा सकता है। इसके अलावा, डायबिटीज़, मोटापा या अन्य जीवनशैली सी जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए नाशपाती अच्छा फल है। प्रिया के अनुसार, ‘नाशपाती नींबू या संतरे की तरह एसिडिक फल नहीं है और इसी आसानी से पचाया जा सकता है। इससे किसी प्रकार की एलर्जी भी नहीं होती। इसे खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है।’
नाशपाती में लेवलोज़ (Levulose) होता है। यह शुगर का एक प्राकृतिक रूप है जो कि बहुत स्वास्थ्यवर्धक होता है। जब कुछ मीठा खाने का मन होता है तो इसे खाया जा सकता है। टॉफी या कैंडी खाने की बजाय मीठे के लिए नाशपाती खाना बहुत अच्छा होता है। ये आपका ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ाता।
अगर आपको नहीं मालूम कि नाशपाती कैसे चुनना है तो इस आसान तरीके को अपनाएं। नाशपाती न बहुत सख्त होनी चाहिए और न ही बहुत मुलायम। इससे मीठी खुशबू आनी चाहिए। अगर इसमें थोड़े बहुत भूरे धब्बे हैं तो कोई बात नहीं लेकिन अगर ये बहुत ज्यादा पका हो तो न लें। नाशपाती को खरीदने के दो-तीन दिनों के अंदर खा लेना चाहिए। इसे बहुत दिनों तक न रखें।