फ्लू या इन्फ्लूएंजा क्या है ? लक्षण क्या है ?और उपचार

इन्फ्लूएंजा को ही हम फ्लू के नाम से भी जानते हैं।इनफ्लुएंजा (श्लैष्मिक ज्वर) एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होनेवाला एक संक्रामक रोग है। इसमें ज्वर और अति दुर्बलता विशेष लक्षण हैं। फुफ्फुसों के उपद्रव की इसमें बहुत संभावना रहती है। यह रोग प्राय: महामारी के रूप में फैलता है। बीच-बीच में जहाँ-तहाँ रोग होता रहता है।

फ्लू तीन प्रकार का होता है, ए, बी और सी। टाइप ए और बी वार्षिक इन्फ्लूएंजा का कारण होते हैं जिससे लगभग 20 फीसदी लोग प्रभावित होते हैं। टाइप ए में एच1एन1, एच2एन2 और एच3एन3 शामिल हैं। टाइप ए के इंफ्लूएंजा में परिवर्तन होता है जिससे प्रभावित व्यक्ति को पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं मिल पाती। टाइप सी भी फ्लू के लक्षण दर्शाता है लेकिन इस तरह का फ्लू कम होता है। हालांकि तीनों तरह का फ्लू एक ही तरह से फैलता है और इनके लक्षण भी एक जैसे ही होते हैं।

रोग का उद्भवकाल एक से दो दिन तक होता है। रोग के लक्षणों में कोई विशेषता नहीं पाई जाती। केवल ज्वर और अतिदुर्बलता ही इस रोग के लक्षण हैं। इनका कारण वायरस में उत्पन्न हुए जैवविष (टॉक्सिन) जान पड़ते हैं। भिन्न-भिन्न महामारियों में इनकी तीव्रता विभिन्न पाई गई है। ज्वर और दुर्बलता के अतिरिक्त सिरदर्द, शरीर में पीड़ा (विशेषकर पिंडलियों और पीठ में), सूखी खाँसी, गला बैठ जाना, छींक आना, आँख और नाक से पानी बहना और गले में क्षोभ मालूम होना, आदि लक्षण भी होते हैं। ज्वर 101 से 103 डिग्री तक निरंतर दो या तीन दिन से लेकर छह दिन तक बना रह सकता है। नाड़ी ताप की तुलना में द्रुत गतिवाली होती है। परीक्षा करने पर नेत्र लाल और मुख तमतमाया हुआ तथा चर्म उष्ण प्रतीत होता है। नाक और गले के भीतर की कला लाल शोथयुक्त दिखाई देती है। प्राय: वक्ष या फुफ्फुस में कुछ नही मिलता। रोग के तीव्र होने पर ज्वर 105रू से 106रू तक पहुँच सकता है।

इस रोग का साधारण उपद्रव ब्रोंको न्यूमोनिया है जिसका प्रारंभ होते ही ज्वर 104रू तक पहुँच जाता हैं। श्वास का वेग बढ़ जाता है, यह 50-60 प्रति मिनट तक हो सकता है। नाड़ी 110 से 120 प्रति मिनट हो जाती है, किंतु श्वासकष्ट नहीं होता। सपूय श्वासनलिकार्ति (प्युरुलेंट ब्रॉनकाइटिस) भी उत्पन्न हो सकती है। खाँसी कष्टदायक होती है। श्लेष्मा झागदार, श्वेत अथवा हरा और पूययुक्त तथा दुर्गंधयुक्त हो सकता है। रक्तमिश्रित होने से वह भूरा या लाल रंग का हो सकता है। फुफ्फुस की परीक्षा, करने पर विशेष लक्षण नहीं मिलते। किंतु छाती ठोंकने पर विशेष ध्वनि, जिसे अंग्रेजी में राल कहते हैं, मिल सकती है।

इस रोग का आंत्रिक रूप भी पाया जाता है जिसमें रक्तयुक्त अतिसार, वमन, जी मिचलना और ज्वर होते हैं।

रोग के अन्य उपद्रव भी हो सकते हैं। स्वस्थ बालकों और युवाओं में रोगमुक्ति की बहुत कुछ संभावना होती है। रोगी थोड़े ही समय में पूर्ण स्वास्थ्यलाभ कर लेता है। अस्वस्थ, अन्य रोगों से पीड़ित, दुर्बल तथा वृद्ध व्यक्तियों में इतना पूर्ण और शीघ्र स्वास्थ्यलाभ नहीं होता। उनमें फुफ्फुस संबंधी अन्य रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

फ्लू होने पर शरीर को हाइड्रेट रखने की आवश्यकता होती है इसलिए फ्लू होने पर आपको अधिक से अधिक पानी का सेवन करना चाहिए। 

 

फ्लू  या इन्फ्लूएंजा के लक्षण


असामान्य थकान का होना
कफ
चक्कर आना
छींक आना
ठंड के साथ बुखार होना
त्वचा का नीला पड़ना
नाक का बहना
मांसपेशियों में दर्द
सांस का फूलना
साँस लेने में कठिनाई होना
सिर दर्द होना आदि।

 

इन्फ्लूएंजा का उपचार

  1. ऐसे में आप गर्म पानी करें और उसमें नींबू निचोड़ लें फिर उस पानी का सेवन करें।

  2. इसमें ठंडा और बासी खाने से दुरी बना कर रखें।

  3. लोगों से हाथ न मिलाएं।

  4. शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करें।

  5. हाथ को अच्छे से धोकर सुखा लें।

  6. व्यायाम को नियमित रूप से करें।

  7. पानी का सेवन उबाल कर करें।

  8. पानी में अजवाइन डालकर उबाल लें और जब तक पानी आधा न रह जाए इसे उबलने दें। पानी का सेवन समय-समय पर करते रहें।

  9. अपने शरीर को जितना हो सके आराम दें।

  10. अपनी हड्डियों की सकाई गर्म पानी की बोतल के द्वारा करें।

  11. अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करें।

  12.  इनफ्लूएँजा वायरस की वैक्सीन का इंजेक्शन लें।

  13. गले को पोटैसियम परमैंगनेट के 1 : 4000 के घोल से प्रात: सायं दोनों समय गरारा करके स्वच्छ करते रहना चाहिए । 

 

डिसक्लेमर : स्वस्थ रहो मस्त रहो में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। यहाँ दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।

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Posted by D.R. Singh on Thursday 20 September 2018
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