हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप

अतिरक्तदाब (Hypertension), जिसे उच्च रक्तचाप (high blood pressure) भी कहा जाता है, दुनिया के तीन वयस्कों में से एक इससे  प्रभावित है। समय के साथ, यह दिल, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे, और शरीर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। उच्च रक्तचाप की जटिल स्थिति में दिल के दौरे, दिल की विफलता, स्ट्रोक, और गुर्दे की बीमारी शामिल हो सकती है। उच्च रक्तचाप को स्वस्थ भोजन, शारीरिक रूप से सक्रिय होने, स्वस्थ वजन बनाए रखने, शराब का सेवन सीमित करने, और तनाव के साथ प्रबंधन और मुकाबला करने सहित जीवन शैली में परिवर्तनों के साथ प्रबंधित किया जा सकता है।केवल अकेले जीवनशैली में बदलाव से रक्तचाप को कम करने का प्रयास न करें, दवा का इस्तेमाल बीमारी के इलाज के लिए किया जाना चाहिए।


हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, जिसे कभी कभी धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है। आराम के समय पर सामान्य रक्तचाप 100-140 mmHg सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग) और 60-90 mmHg डायस्टोलिक (निचली-रीडिंग) की सीमा के भीतर होता है। उच्च रक्तचाप तब उपस्थित होता है यदि यह 90/140 mmHg पर या इसके ऊपर लगातार बना रहता है।

हाइपरटेंशन प्राथमिक (मूलभूत) उच्च रक्तचाप तथा द्वितीयक उच्च रक्तचाप के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। 90-95% मामले "प्राथमिक उच्च रक्तचाप" के रूप में वर्गीकृत किये जाते हैं, जिसका अर्थ है स्पष्ट अंतर्निहित चिकित्सीय कारण के बिना उच्च रक्तचाप।[1] अन्य परिस्थितियां जो गुर्दे, धमनियों, दिल, या अंतःस्रावी प्रणाली को प्रभावित करती हैं, शेष 5-10% मामलों (द्वितीयक उच्च रक्तचाप) का कारण होतीं हैं।

हाइपरटेंशन स्ट्रोक, मायोकार्डियल रोधगलन (दिल के दौरे), दिल की विफलता, धमनियों की धमनी विस्फार (उदाहरण के लिए, महाधमनी धमनी विस्फार), परिधीय धमनी रोग जैसे जोखिमों का कारक है और पुराने किडनी रोग का एक कारण है। धमनियों से रक्त के दबाव में मध्यम दर्जे की वृद्धि भी जीवन प्रत्याशा में कमी के साथ जुड़ी हुई है। आहार और जीवन शैली में परिवर्तन रक्तचाप नियंत्रण में सुधार और संबंधित स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। हालांकि, दवा के माध्यम से उपचार अक्सर उन लोगों के लिये जरूरी हो जाता है जिनमें जीवन शैली में परिवर्तन अप्रभावी या अपर्याप्त हैं।

 

कुछ हकीकत 


* कुछ पूरक स्वास्थ्य दृष्टिकोण बताते हैं कि जीवनशैली के कार्यक्रम के तत्व रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।


* शोध के नतीजे बताते हैं कि ध्यान, व्यायाम और योग जैसे कुछ दिमाग और शरीर के अभ्यासों से उच्च रक्तचाप वाले लोगों में रक्तचाप पर फायदेमंद प्रभाव हो सकते हैं। यह अभी अनिश्चित है कि विश्राम तकनीक सहायक हैं या नहीं।


* 2013 में, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि बायोफीडबैक biofeedback )और पारस्परिक ध्यान (Transcendental Meditation,), का परंपरागत दवा (conventional medication,)के साथ उपयोग से  लोगों को उनके रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है।


* शोध के नतीजे बताते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ और आहार की खुराक, कोको, लहसुन, मछली के तेल (ओमेगा -3 फैटी एसिड), फ्लेक्ससीड, हरी या काली चाय, प्रोबियोटिक, और जड़ी बूटी उच्च रक्तचाप वाले लोगों में रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ये प्रमाण है  कि ये उत्पाद रक्तचाप को सीमित मात्रा में कम कर सकते हैं, और रक्तचाप पर इन उत्पादों के प्रभाव थोड़े ही होते हैं।उच्च रक्तचाप का इलाज करने के लिए इस्तेमाल दवाओं का तुलनात्मक प्रभाव का दावा  किसी पूरकआहार से नहीं किया गया है।

 
 

सुरक्षा

 

* यदि आप उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता द्वारा निर्धारित उपचार योजना का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उच्च रक्तचाप की गंभीर जटिलताओं को रोक या देरी कर सकता है। एक निर्धारित उत्पाद या अभ्यास के साथ अपने निर्धारित उपचार को प्रतिस्थापित न करें। यदि आप अपने उच्च रक्तचाप के लिए पूरक या एकीकृत दृष्टिकोण पर विचार कर रहे हैं, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से चर्चा अवश्य करें।

 

* अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को उन सभी पूरक आहार के बारे में बताएं जिन्हें आप ले रहे हैं या विचार कर रहे हैं। जड़ी बूटी कड़वा संतरे, इफेड्रा, जिन्सेंग, और लाइसोरिस रूट जैसे कुछ पूरकआहार , रक्तचाप बढ़ा सकते हैं, और कुछ पूरक आहार दवाओं के साथ हानिकारक तरीकों से बातचीत कर सकते हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं शामिल हैं।

 

* मन और शरीर के अभ्यास आमतौर पर स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित होते हैं यदि एक योग्य चिकित्सक द्वारा उचित ढंग से किया जाता है या एक प्रशिक्षित प्रशिक्षक द्वारा सिखाया जाता है। हालांकि, कुछ अभ्यास स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले लोगों को कुछ योगों को संशोधित करने या इससे बचने की आवश्यकता हो सकती है। यदि आपके पास उच्च रक्तचाप है, तो आप अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता और अपने पूरक स्वास्थ्य चिकित्सक या प्रशिक्षक से बात करें यदि आप दिमाग और शरीर के अभ्यास पर विचार कर रहे हैं।

 

Disclaimer +
इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्मेदारी लेखक की नहीं है । उपलब्ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।
 

Posted by D.R. Singh on Monday 1 October 2018
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फल और सब्जियाँ खाएं

हमारी माएं हमें सब्जियाँ और फल खाने के लिए कह कर हमें एक बहुत अच्छी सलाह देतीं थीं। फल और सब्जियाँ हमारे आहार का एक महत्वपूर्ण भाग हैं क्योंकि ये वो विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी हैं। परन्तु, कई लोग अभी भी उन्हें उचित मात्रा में नहीं खाते।

संदेश नहीं सुना जा रहा

पिछले कई वर्षों में, अमेरिकी स्वास्थ विभाग ने प्रतिदिन फल और सब्ज़ियों के कम से कम पाँच पोर्शन खाने की सलाह दी है। फिर भी, सात में से कम से कम एक व्यक्ति ही इस लक्ष्य को प्राप्त करता है। वास्तव में, एक तिहाई अमेरिकी लोग दिन में फलों और सब्ज़ियों के केवल दो पोर्शन ही खाते हैं और उनकी औरों की तुलना में एक संसाधित नाश्ता चुनने की संभावना चार गुना होती है। किसी भी दिन, करीब आधी जनसंख्या एक भी फल नहीं खाती।

वजहों की एक टोकरी

विभिन्न रंगों के फलों और सब्जियों को खाने के कई कारण हैं। फल और सब्ज़ियाँ लगभग वसा मुक्त होती हैं, उनमें नमक की मात्रा कम होती है और वे फ़ाइबर का एक बेहतरीन स्रोत है। गाजर और खरबूजे, विटामिन ए प्रदान करते हैं, जो आँखों और प्रतिरक्षण प्रणाली को बनाए रखते हैं। अन्य फल और सब्जियाँ, जैसे कि केले और पालक में पोटैशियम होता है, जो कि नसों और मांसपेशियों के के लिए आवश्यक हैं। ब्रॉकली और ऐस्परेगस जैसी हरी सब्ज़ियाँ विटामिन बी प्रदान करती हैं, जो खाने को ऊर्जा में बदलने के लिए आवश्यक हैं।

लेकिन सभी फलों और सब्ज़ियों में फ़ायटोनूट्रिएंट्स होते हैं, जो पौधों के स्वास्थ्यवर्धक घटक होते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन ये दर्शाते हैं कि फ़ायटोनूट्रिएंट्स आँखों, ह्रदय, जिगर, और त्वचा जैसे महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करते हैं, और ये ऐंटीऑक्सीडेन्ट्स के रूप में भी कार्य करते हैं।

ऐंटीऑक्सीडेन्ट्स सुरक्षा

वर्तमान अनुसंधान ने विभिन्न खाद्य पदार्थों की कुल ऐंटीऑक्सीडेंट को मापा है और फलों और सब्ज़ियों को उस सूची में सबसे ऊपर रखा है। ऐंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर की फ़्री रैडिकल्स से रक्षा करते हैं जो कि हमारी कोशिकीय झिल्लियों को हानि पहुँचा सकते हैं।

क्योंकि ऐंटीऑक्सीडेंट युक्त फलों और सब्ज़ियों की सुझाई गई दैनिक मात्रा प्रतिदिन खाना संभव नहीं है, अपने आहार की उचित उत्पादों के साथ पूर्ती करें। हर्बलाइफ़ के गार्डन ७ डाइटेरी सप्लीमेंट रंगीन फलों और सब्ज़ियों के सात पोर्शन में पाए जाने वाले शक्तिशाली फाटोनूट्रिएंट और ऐंटीऑक्सीडेंट के लाभों के बराबर शक्ति से आपके स्वास्थ की रक्षा करता है। ये महत्वपूर्ण पैष्टिक तत्व

इसलिए प्रतिदिन बहुत सी सब्ज़ियाँ और फल खाने की आदत डालें। आप अपने शरीर के लिए इससे बेहतर कार्य नहीं कर सकते।

इन वक्तव्यों का खाद्य और दवा प्राधिकरण द्वारा मूल्यांकन नहीं किया गया है। इन उत्पादों को निदान, इलाज, रोग निवारण और बचाव के लिए नहीं बनाया गया है।

Posted by D.R. Singh on Monday 1 October 2018
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आवश्यक मिनरल से भरपूर हैं ये आहार

कुछ महत्वपूर्ण मिनरल हमारे शरीर के ठीक ढंग से काम करने के लिए आवश्यक होते हैं। बुद्धा ने एक बार कहा था कि शरीर के स्वास्थ्य की देखभाल करना, हर व्यक्ति का कर्तव्य है। एक स्वस्थ शरीर एक मजबूत और साफ मन के लिए आवश्यक है। ये खनिज, तरल पदार्थ के संतुलन बनाये रखने के लिए ,  हड्डियों को मजबूत  बनाये रखने के लिए , मांसपेशियों के निर्माण और मसल्स के मूवमेंट और हार्मोन को स्रावित करने में मदद करते हैं। आइए ऐसे ही आवश्यक मिनरल से भरपूर आहार की जानकारी इस लेख द्वारा समझते हैं।

१ - आयरन से भरपूर फलियां

फलियां में सेम, मटर और दालें शामिल है। स्वाभाविक रूप से फैट और कोलेस्ट्रॉल में कम फलियों में पोटेशियम, आयरन और मैग्नीशियम का उच्च स्तर होता है। फलियों को स्वस्थ आहार के रूप में अपनी डाइट का हिस्सा बनायें।

२ - चीज

चीज एक डेयरी उत्पाद है , दूध को दबाकर बना, दुनिया भर में मशहूर उत्पाद है। स्वादिष्ट, पौष्टिक और बहुमुखी, इस उत्‍पाद को आप अन्य व्यंजन के साथ मिलाकर या ऐसे भी खा सकते हैं । चीज में कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक जैसे मिनरल शामिल होते हैं। दूध और दही कैल्शियम के अन्य स्रोत हैं।

३ - मीट और अंडे

मीट को प्रोटीन का अच्छे स्रोत के रूप में जाना जाता है और आवश्यक विटामिन और मिनरल जैसे आयरन, जिंक, फास्‍फोरस और कोबाल्ट आदि शामिल है। सी फूड जिंक और आयरन का समृद्ध स्रोत है। अंडा संतुलित आहार का एक अभिन्न हिस्सा है, आप चाहे तो अंडे को नाश्ते, लंच या डिनर में खा सकते हैं। यह पोषक तत्वों और कैल्शियम, सेलेनियम और फास्फोरस जैसे मिनरल से भरपूर होते हैं।

४ -शकरकंद यानी मीठा आलू

शकरकंद यानी मीठा आलू में अधिक मात्रा में पोटेशियम होता है जो ऑक्सीडेटिव के नुकसान से रक्त वाहिकाओं की रक्षा और रक्त वाहिनियों की दीवारों को मोटा होने से रोकता है। इसके अलावा मीठे आलू में मैंगनीज और फास्फोरस का उच्च स्तर होता है।

५ - नट्स और साबुत अनाज

नट्स जैसे काजू, मूंगफली और बादाम में सोडियम होता है। यह शरीर के लिए उचित रक्तचाप को बनाए रखने और तंत्रिका संकेतों के हस्तांतरण की मदद से तंत्रिका तंत्र के काम को अच्छे से करने के लिए आवश्यक है। साबुत अनाज किसी भी भोजन का एक आवश्यक हिस्सा हैं और मैग्नीशियम और सेलेनियम जैसे मिनरल होते हैं। सेलेनियम ऑक्सीकरण से कोशिकाओं की रक्षा करता है और एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली प्रदान करता है।

 

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Posted by D.R. Singh on Tuesday 25 September 2018
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डायबिटीज और दिल के लिए फायदेमंद है कुंदरू

अगर आपको कुंदरु की सब्‍जी खाने में पसंद है तो आप कुंदरु की सब्‍जी खाकर अपना ब्लड शुगर नियंत्रित रख सकते है। परवल की तरह दिखने वाला कुंदरु की सब्‍जी को खाने के कई सारे फायदें हैं।

कुंदरू में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन बी -2 (रिबोफाल्विन) विटामिन बी -1 (थायमिन), विटामिन सी, विटामिन बी -3 (नियासिन) जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं, जो शरीर के ल‍िए काफी फायदेमंद हैं। कुंदरू की सब्‍जी को तिंदूरी भी कहा जाता है। यह ककड़ी वर्ग यानी कुकुरबिटेसी परिवार की सदस्य है। इसे पुरानी लताओं की कटिंग से बोया जाता है।

कुंदरू बहुत पौष्टिक होता है लेकिन इसके बारे में लोगों को कम जानकारी है। कुंदरू को कई देशों में बेबी वाटरमेलन के नाम से भी जाना जाता है। आपको जान कर हैरानी होगी कि सामान्य सा दिखने वाला कुंदरू आपको कई रोगों और परेशानियों से बचा सकता है। कुंदरू में बीटा-कैरोटीन होता है जो दिल के रोगों से बचाव के लिए बहुत जरूरी एंटीऑक्सीडेंट है। 

100 ग्राम कुंदरू में 1.4 मिलीग्राम आयरन, 40 मिलीग्राम कैल्शियम, 0.07 मिलीग्राम विटामिन बी-1 और विटामिन बी-2 और 1.6 मिलीग्राम डाइट्री फाइबर होता है। इन पोषक तत्वों के कारण कुंदरू का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।

इम्‍यून सिस्‍टम बढ़ाता है

विटामिन सी, विटामिन बी-2, विटामिन बी-1 और विटामिन बी-3 ये सभी कुंदरू में अच्‍छी मात्रा में उपलब्‍ध होते हैं। विटामिन सी और बी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहती है तो आपका शरीर बहुत सी बीमारियों को स्‍वत: ही खत्‍म कर देता है और जो आपको विभिन्‍न प्रकार के संक्रमणों से बचाता है।

उतर जाता है चश्‍मा

कुंदरू की सब्‍जी को अधकच्‍ची पकाकर लगातार कुछ दिनों तक खाने से आंखों से चश्मा तक उतर जाता है। साथ ही माना जाता है कि इसकी सब्जी के निरंतर उपभोग से बाल झड़ने का क्रम बंद हो जाता है। यह गंजेपन से भी बचा सकता है।

डायबिटीज में फायदेमंद है कुंदरू

आयुर्वेद में डायबिटीज के लिए कुंदरू को बहुत फायदेमंद माना गया है। डायबिटीज के रोगियों को कुंदरू की सब्जी का सेवन करना चाहिए क्योंकि ये ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है। डायबिटीज में कुंदरू से भी ज्यादा इसकी पत्तियां फायदेमंद होती हैं। इसकी पत्तियों को उबालकर सूप बनाकर पीने से डायबिटीज को बहुत तेजी से कंट्रोल किया जा सकता है। कुंदरू खाने से डायबिटीज के नए रोगियों में शुगर का लेवल तकरीबन 16 फीसदी तक गिर जाता है। एक शोध में भी ये बात साबित हो चुकी है। कुंदरू डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण साबित हो सकता है। यह सब्जी ऐसे मरीजों के खून में शुगर का स्तर कम कर सकती है।

मोटापा कम करे कुंदरू

कुछ शोध बताते हैं कि कुंदरू का सेवन मोटापा कम करने में भी फायदेमंद है। कुंदरू हमारे शरीर में प्री-एडिपोसाइट्स को फैट सेल्स में बदलने से रोकता है। इसके सेवन से आपका मेटाबॉलिज्म भी तेज होता है, जिसे ब्लड शुगर का प्रभाव कम होता है और आपका मोटापा कम होता है। इस पौधे में संभावित एंटी-एडीपोजेनिक एजेंट की उपस्थिति मोटापे से प्रेरित चयापच रोगों को कम करने के लिए उपयुक्‍त हो सकती है।

पाचन और कब्ज की समस्या में फायदेमंद है कुंदरू

कुंदरू में उपस्थित फाइबर, पोषक तत्‍व और फाइटोकेमिकल (Phytochemical) पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करते हैं। फाइबर वाले आहारों के सेवन से आंतों में मौजूद सभी गंदगी बाहर हो जाती है। इसके अलावा फाइबर का सेवन मल को नरम बनाता है, जिससे आपको कब्ज की समस्या नहीं होती है। कुंदरू पाचन एंजाइमों (Digestive Enzymes) की भी मदद करता है इस कारण इसका सेवन करने से पाचन संबंधित विभिन्‍न समस्‍याएं दूर होती हैं।इसलिए अगर आप कुंदरू का सेवन करते हैं, तो आपका पाचन बेहतर होता है।

किडनी की पथरी को रोके कुंदरू

पथरी का मुख्य कारण कैल्शियम और अन्य तत्वों का मूत्र मार्ग में जमाव है। अगर शरीर में नमक की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी की पथरी का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन कुंदरू में मौजूद कैल्शियम जमता नहीं है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके अलावा कुंदरू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स पथरी में जमने वाले तत्वों को रोकते हैं, जिससे पथरी का बढ़ना रुक जाता है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी है मददगार

कुंदरू में उचित मात्रा में राइबोफ्लेविन और नियासिन होते हैं जो कि मस्तिष्‍क से विभिन्‍न हार्मोन के कामकाज और उनके स्राव से संबंधित होती हैं जो सीधे मूड से संबंधित होते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि रि राइबोफ्लेविन (Riboflavin) की पर्याप्‍त मात्रा बाले खाद्य पदार्थों का सेवन कर स्‍वाभाविक रूप से अवसाद का इलाज किया जा सकता है।

दिल के लिए है फायदेमंद

कुंदरू में पोटैशियम की मात्रा भरपूर होती है इसलिए इसका सेवन दिल के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पोटैशियम शरीर में रक्त के प्रवाह को ठीक रखता है जिससे ब्लड प्रेशर नहीं घटता-बढ़ता है। ब्लड प्रेशर का बढ़ना-घटना ही दिल की बीमारियों का मुख्य कारण है।

प्रेगनेंसी में हड्डियो के ल‍िए बढि़या

कुंदरु में अच्‍छी मात्रा में केल्शियम होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके अलावा इसमें आयरन होता है। प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन से महिलाओं की हड्ड‍ियां मजबूत तो बनाता है इसके साथ खून की कमी को भी पूरा करता है।

 

डिसक्लेमर : स्वस्थ रहो मस्त रहो में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। यहाँ दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।

Posted by D.R. Singh on Thursday 20 September 2018
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कहीं आपकी थकान डायबिटीज़ का संकेत तो नहीं?

आप चाहे कितने भी स्‍वस्‍थ हों थकान कभी ना कभी तो आपको जकड़ ही लेती है। कभी-कभी बहुत ज़्यादा काम करने की वजह से भी स्‍वस्‍थ होने पर भी थकान हो जाती है। वहीं अगर आप बहुत ज़्यादा तनाव में रहते हैं तो भी थकान महसूस होती है। हालांकि, हमेशा थकान रहने का मतलब है कि आप बीमार हैं। यहां तक कि थकान कई बीमारियों का लक्षण भी होता है। ये छोटी या बड़ी मानसिक या मनोवैज्ञानिक बीमारी हो सकती है। सिर में दर्द की वजह से थकान हो जाती है और किसी बड़ी बीमारी जैसे कि ह्रदय रोग, कैंसर या डायबिटीज़ में भी मरीज़ को थकान महसूस होने लगती है।

अगर आपको भी बार-बार थकान महसूस होती है तो इसके कारण का पता लगा पाना बहुत मुश्किल होता है। थकान एक नहीं बल्कि कई बीमारियों का लक्षण होता है इसलिए इसके पीछे की वजह जान पाना मुश्‍किल काम है। 

हम सभी जानते हैं कि डायबिटीज़ एक मेटाबॉलिक विकार है। हाल ही में एक स्‍टडी में सामने आया है कि जब किसी इंसान को दिन के एक ही समय पर थकान महसूस हो तो ये मधुमेह का लक्षण हो सकता है। खासतौर पर अगर उसमें डायबिटीज़ के और भी लक्षण नज़र आ रहे हैं तो संभावना और भी बढ़ जाती है। तो चलिए जानते हैं डायबिटीज़ क्या है और इसका दिन के मध्‍य में थकान से क्‍या संबंध है और इस बीमारी का पता चलने पर क्‍या करना चाहिए। 



क्‍या है डायबिटीज़ 



डायबिटीज़ को मेटाबॉलिक विकार कहा जाता है जिसमें शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य से काफी ज़्यादा बढ़ जाता है। ये सब इंसुलिन हार्मोन की अस्थिरता के कारण होता है। इसका इलाज संभव है लेकिन इसके लिए आपको इसके लक्षणों को समय पर पहचानना होगा और नियमित दवाएं और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा। 



दिन के मध्‍य में थकान होने का डायबिटीज़ से संबंध 



जैसा कि हमने पहले भी बताया कि जब कोई इंसान डायबिटीज़ से ग्रस्‍त होता है तो उसका ब्‍लड शुगर लेवल बड़ी तेज़ी से बढ़ जाता है और इसके कई तरह के लक्षण सामने आते हैं। अगर आपको दिन के मध्‍य जैसे कि दोपहर के 1 बजे से 4 बजे के बीच में थकान महसूस हो रही है खासतौर पर लंच के बाद तो ये मधुमेह का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि खाने के तुरंत बाद ब्‍लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ जाता है। इस शुगर को पचाने के लिए शरीर को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है क्‍योंकि डायबिटीज़ के मरीज़ों में इंसुलिन हार्मोन कम होता है। इस वजह से मरीज़ को बहुत थकान महसूस होती है और दिन के मध्‍य समय में ऐसा ज़्यादा होता है। दिन में कभी भी खाना खाने के बाद थकान हो सकती है क्‍योंकि खाना खाने के बाद शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और डायबिटीज़ में थकान महसूस होना प्रमुख लक्षण है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं होता है उनमें ब्‍लड शुगर लेवल दिन के समय लो रहता है और अगर आपको मधुमेह है तो आपका ब्‍लड शुगर लेवल दिन के समय ज़्यादा रहेगा। हालांकि, किसी इंसान को डायबिटीज़ है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए दिन के समय में होने वाली थकान ही पर्याप्‍त लक्षण नहीं है। डायबिटीज़ के बहुत सारे लक्षण होते हैं और इसके टेस्‍ट से भी आप इस बीमारी का पता लगा सकते हें। 




आइए जानते हैं डायबिटीज़ के अन्‍य लक्षणों के बारे में:



अत्‍यधिक प्‍यास लगना 
बार-बार पेशाब आना 
अचानक वज़न कम होना 
आंखों की रोशनी कम होना 
भूख में कमी आना या बढ़ जाना 
इम्‍युनिटी कमज़ोर होना 
घाव का धीरे भरना 
बीमारी धीरे धीरे ठीक होना 
मसूड़ों में सूजन होना मसूड़ों में लगातार संक्रमण फैलना 
यौन इच्‍छा में कमी होना 
पैरों और हाथों में सुन्‍नपन होना 
गैस्ट्रिराइटिस 

अगर आपको उपरोक्‍त बताए गए मधुमेह के लक्षण नज़र आते हैं और दिन में थकान भी महसूस होती है तो तुरंत डॉक्‍टर से चैकअप करवाकर ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए दवाओं का सेवन शुरु कर दें। इससे इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। 



जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी आप इसी बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं जैसे कि: 



स्‍वस्‍थ आहार लें, चीनी और ग्‍लूकोज़ का सेवन कम करें। 
रोज़ व्‍यायाम करें और संतुलित वज़न बनाए रखें। 
धूम्रपान और शराब का सेवन कम कर दें। 
ब्‍लड प्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करें। 
कार्बोहाइड्रेट और वसा का सेवन कम करें। 
नियमित दवाएं लें और नैचुरल डायबिटीज़ फ्रेंडली जूस लें जिसमें शुगर ना हो।

 

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Posted by D.R. Singh on Thursday 20 September 2018
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