कब्ज

कब्ज

कब्जपाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है।

पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। नित्य कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है।

प्रमुख कारण

कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर (Fibers) का अभाव।

अल्पभोजन ग्रहण करना।

शरीर में पानी का कम होना

कम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिकमेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना।

कुछ खास दवाओं का सेवन करना

बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)

थायरॉयड हार्मोन का कम बनना

कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा

मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या

कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)

चायकॉफी बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना।

गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना।आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी।

दु:ख, चिन्ता, डर आदि का होना।

सही समय पर भोजन न करना।

बदहजमी और मंदाग्नि (पाचक अग्नि का धीमा पड़ना)।भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात् जबरदस्ती भोजन ठूँसना। जल्दबाजी में भोजन करना।

बगैर भूख के भोजन करना।

ज्यादा उपवास करना।

भोजन करते वक्त ध्यान भोजन को चबाने पर न होकर कहीं और होना।

उपाय

रेशायुक्त भोजन का अत्यधित सेवन करना, जैसे साबूत अनाज

ताजा फल और सब्जियों का अत्यधिक सेवन करना

पर्याप्त मात्रा में पानी पीना

वसा युक्त भोजन का सेवेन कम करे

ज्यादा समस्या आने पर चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए।

कुछ विशिष्ट प्रयोग

खाने में ऐसी चीजें ले, जि‍नसे पेट स्‍वयं ही साफ हो जाय।

नमक – छोटी हरड और काल नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।

ईसबगोल – दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।

चना – कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चेने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें। प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।

बेल – पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।

नीबू – नीम्‍बू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।

नारंगी – सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ति‍ बढ़ाती हैं।

मेथी – के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।

गेहूँ  - के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।

धनिया – सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।

दालचीनी – सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।

टमाटर - कब्‍जी दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाश्‍य आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।

 

  • Disclaimer +

    इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध  सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। 
Posted by D.R. Singh on Saturday 9 April 2016
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वर्कआउट के बाद खायें ये आहार

वर्कआउट के बाद खायें ये दस आहार

वर्कआउट के बाद शरीर से ऊर्जा का ह्रास होता ही है साथ ही प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्‍वों का भी ह्रास होता है।

1 - वर्कआउट के बाद

वर्कआउट करके हम खुद को फिट और मजबूत बनाते हैं। इसके लिए हम वॉकिंग, वेट ट्रेनिंग, एरोबिक्स, फुटबाल, रनिंग आदि प्रकार के वर्कआउट करते हैं। लेकिन इसमें शरीर से ऊर्जा का ह्रास तो होता ही है साथ ही प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्‍वों का भी ह्रास होता है। इसके कारण शरीर में थकान लगती है। इसलिए शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए वर्कआउट के 30 मिनट के अंदर एनर्जी देने वाले आहार का सेवन करना चाहिए। आगे के स्‍लाइडशो में जानिए उन आहारों के बारे में जिन्‍हें वर्कआउट के बाद खाना चाहिए।

2 - अंडा खायें

ऊर्जा का सबसे बेहतरीन स्रोत होता है, क्‍योंकि इसमें प्रोटीन, जिंक और कोलीन होता है। मांसपेशियों को बढ़ाने वाले भोजन में अंडे का जवाब नहीं। दूसरे खाद्य पदार्थ की तुलना में आप कम अंडे खाकर भी ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन हासिल कर सकते हैं। अंडे का ऑमलेट भी आप खा सकते हैं।

3 - एवोकाडो फल खाइए

एक साधारण से एवोकाडों में 20 से अधिक जरुरी पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं, इसके अलावा एक अवोकाडो में 250 कैलोरी, 10 ग्राम फाइबर और 15 ग्राम मोनोसैच्‍युरेटेड फैट मौजूद होता है। इसलिए वर्कआउट के बाद ऊर्जा पाने के लिए एवोकाडो का सेवन कीजिए।

4 - शकरकंद

शकरकंद यानी स्‍वीट पोटैटो भी ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए वर्कआउट के बाद शकरकंद का सेवन कीजिए।

5 - सालमन मछली खायें

सालमन मछली में बहुत सारा ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो तुरंत शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन डी, विटामिन बी6 और विटामिन बी12 मौजूद होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। सालमन खाने के बाद इंसुलिन का स्‍तर भी बढ़ जाता है।

6 - ओट्स खाइए

ओट्स में भरपूर ऊर्जा होती है। वर्कआउट के बाद इसे खाने से शरीर की क्षमता और ताकत बढ़ती है। इसे दूध के साथ खा सकते हैं। ओट्स न होने पर आप घरेलू दलिया का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हालांकि यह थोड़ा मोटा होता है लेकिन ताकत में मामले में ओट्स से कहीं बेहतर है।

7 - सफेद चावल

हालांकि ब्राउन राइस भी आपके लिए बेहतर विकल्‍प है लेकिन वर्कआउट के बाद ब्राउन राइस की तुलना में सफेद चावल खाना अच्‍छा विकल्‍प है। वर्कआउट के बाद शरीर को ऊर्जा देने के लिए हाई ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स वाले आहार खाने चाहिए और सफेद चाव शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ाता है जिससे ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स बढ़ जाता है। इसलिए वर्कआउट के बाद सफेद चावल आपके लिए अच्‍छा विकल्‍प है।

8 - ड्राई फ्रूटस

वर्कआउट के बाद आप ड्राई फूड खा सकते हैं। ड्राई फूड्स जैसे - बादाम, छुआरा, मुनक्‍का, चिलगौंजा आदि में मोनोसैचुरेटेड फैट होता है जो शरीर को ताकत देता है। इसके अलावा ये शरीर को बीमारियों से भी बचाते हैं।

9 - हुमस

इसमें आयरन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। इसके अलावा यह प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का भी बहुत अच्‍छा स्रोत है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। वर्कआउट के बाद यह अच्‍छा विकल्‍प है।

Hummus पकाने की विधि - 

Hummus बनाने के लिए सामग्री 

१-छोला (काबुली चना) 150 ग्राम २ -लहसुन 2 लौंग 

३ - नमक स्वादअनुसार 

४ -Tahini(तिल के बीज का पेस्ट) 3 बड़े चम्मच 

५ -जैतून का तेल 4 चम्मच 

६ -नीबू का रस 1 चम्मच 

७ -लाल मिर्च पाउडर 1/2 चम्मच

बनाने की विधि - 

चरण- 1 

रात भर छोला (काबुली चना) को पानी में भीगा लें और सुबह पानी को निकालकर और नरम होने तक ताजा पानी में उबाल लें।  और ऊपर का छिलका को हटा लें और उसे पीसकर पेस्ट बना लें। 

चरण-2

लहसुन, नमक और ताहिनी(तिल के बीज का पेस्ट)को काबुली चने के पेस्ट में मिलाकर मिश्रण बना लें और दो चम्मच जैतून का तेल भी इस मिश्रण में डालें। नींबू का रस भी दल लें और पूरी तरह से महीन होने तक पीस लें 

चरण-3 

पेस्ट को निकलकर एक चौड़े प्लेट में रख लें और फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें । 

बस परोसने के समय जैतून का तेल,लाल मिर्च पाउडर छिड़क लें और रोटी या ब्रेड के साथ खाएं  ।

10 - चिकन और मटन

चिकन में ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एमीनो एसिड होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसके अलावा मटन में भी प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन बी होता है। इसलिए वर्कआउट के बाद चिकन या मटन का सेवन कीजिए।

11 - फल खायें

ताजे फलों का सेवन आपको बीमारियों से बचाता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करता है। फलों में विटामिन सी, प्रोटीन, पानी, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्‍व पाये जाते हैं जो शरीर को ऊर्जावान बनाते हैं। इसलिए वर्कआउट के बाद ताजे फलों के साथ फलों के जूस का भी सेवन कर सकते हैं।

 

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    इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध  सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। 
Posted by D.R. Singh on Saturday 9 April 2016
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दूध के साथ इन चीजों के सेवन से नहीं होंगी बीमारियां Inline image 1

दूध के साथ इन चीजों के सेवन से नहीं होंगी बीमारियां

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दूध  और इससे बनी दूसरी चीजें भी बहुत सेहतमंद होती हैं। लेकिन अगर दूध इतना फायदेमंद है तो इसमें दूसरी पौष्टिक चीजों को मिलायेंगे तो इसकी पौष्टिकता बढ़ना स्वाभाविक है।

 दूध को बनायें अधिक पौष्टिक

दूध को सेहतमंद माना जाता है, क्योंकि  न केवल ये हमारा पहला आहार होता है बल्कि इसमें मौजूद कैल्शियम हमारी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। बचपन हो या जवानी हमें स्वस्थ्य  रहने और बीमारियों से बचने के लिए हमेशा नियमित रूप से दूध पीने की सलाह दी जाती है। न केवल दूध बल्कि इससे बनी दूसरी चीजें भी बहुत सेहतमंद होती हैं।इस लेख में हम आपको दूध के साथ, बादाम, केला, शहद, हल्‍दी मिलाकर सेवन करने के फायदों के बारे में बता रहे हैं।

2 - केला और दूध

दूध और केले का सेवन करने की सलाह वजन बढ़ाने के लिए दी जाती है। लेकिन क्या  आप जानते हैं केला और दूध पीने के कई दूसरे फायदे भी हैं। यह मांसवर्धक है और बीमारी के बाद की कमजोरी व थकान को दूर कर शरीर को एनर्जी देता है। इसके अलावा यह हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत भी बनाता है। रोज केले और दूध का शेक बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं। कब्ज, अधिक कॉलेस्ट्रॉल और कफ की समस्या वाले लोंगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

3 - बहुत फायदेमंद है हल्दी-दूध

हल्दी  को महाऔषधि कहा जाता है,  अगर दूध में हल्दी को मिलाकर लिया जाये तो सामान्य और खतरनाक बीमारियों का भी खात्‍मा कर सकता है। हल्दी में विटामिन-ए, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। यह प्राकृतिक पेन किलर भी है। 250 मिली दूध में एक चौथाई चम्मच हल्दी और चीनी या गुड डालकर उबालें, इसका सेवन दिन में एक बार करें। इससे पुराने जुकाम, कफ के साथ खांसी, गले में एलर्जी, चोट में दर्द या सूजन, खुजली, दिल की समस्याएं , फेफड़े की बीमारियां, त्वचा की समस्याएं , यूरिन और लीवर  संबंधी बीमारी में लाभ होता है । इसका सेवन डायबिटीज के रोगी भी बिना शुगर के कर सकते हैं।

4 - दूध और मुनक्का

मुनक्का और दूध का सेवन करने से शरीर को ग्लूकोज और विटामिन्स मिलते हैं। 250 मिली दूध में दस मुनक्कों (बीज निकाल लें) को डालकर उबालें। महीने में 10-15 दिन केवल रात के समय इसका सेवन करें। इससे खूनी बवासीर, गले व यूरीन में जलन, आंखों में जलन व रेडनेस, दिमाग की कमजोरी, बुखार व कब्ज में लाभदायक है। इसके साथ शरीर में दर्द, स्नायुतंत्र में गड़बड़ी, पैरों में ऐंठन और नकसीर जैसी समस्याओं में यह लाभकारी है। मधुमेह और दमा के मरीज और कफ के साथ खांसी होने पर इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

5 - गुणकारी है बादाम और दूध

बादाम और दूध बहुत पौष्टिक माना जाता है, इन दोनों ही कैल्शियम और विटामिन्स होता है, जिससे प्रोटीन, फाइबर व मिनरल्स की पूर्ति होती है। 250 मिली दूध में 6 बारीक पिसे बादाम व चीनी के साथ इलायची को उबालकर रोज पी सकते हैं। इससे बुखार व पीलिया के बाद की कमजोरी दूर होती है  और मांसपेशियां भी मजबूत होंती है । इसके सेवन से याददाश्त  में सुधार होता है । आंतों, आंखों, पेट व गले में जलन और सूखी खांसी में भी फायदेमंद है। दस्त, भूख न लगने पर इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

6 - शहद के साथ दूध

शहद में लगभग सभी गुण होते हैं, दूध में इसे मिलाने से इसका फायदा अधिक मिलता है। दूध और शहद दोनों में विटामिन ए, बी व डी और कैल्शियम होता है, जो कि एंटी-एलर्जिक, एंटीफंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुणों से भरपूर होता है। 250 मिली दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर रोज एक बार पियें। इससे खून साफ होता है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, लीवर संबंधी समस्‍यायें दूर होती हैं और तनाव भी लाभ होता है। मधुमेह के रोगी व जिनको नकसीर की समस्या हो उन्हें  इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

 

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Posted by D.R. Singh on Saturday 9 April 2016
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सुबह-सवेरे गुनगुना नींबू पानी पीने के हैं कई फायदे

सुबह-सवेरे गुनगुना नींबू पानी पीने के हैं कई फायदे

सुबह उठते ही अगर आप एक ग्लास गुनगुना नींबू पानी पियें, तो इससे आपके स्वास्थ्य को कई फायदे हो सकते हैं। ये वज़न कम, लिवर मजबूत, त्वचा चमकदार करने के साथ साथ आपका पूरा दिन ताज़ा बना सकता है।

 
  • 1 - सुबह पियें गुनगुना नींबू पानी

     

    अगर आप अपने आप को पूरी तरह स्वस्थ रखने का कोई रास्ता ढूंढ रहे हैं तो आपकी तलाश एक आसान से तरीके पर खत्म हो सकती है। रोज़ सुबह उठने के बाद सबसे पहले गुनगुना नींबू पानी पीने से स्वास्थ्य को एक नहीं बल्कि कई फायदे पहुंचते हैं। आइये जानते हैं इन्हीं फायदों के बारे में।


    सुबह पियें गुनगुना नींबू पानी

     
  • 2 - इम्यून सिस्टम को सही रखता है

    नींबू जैसे खट्टे फलों में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो सर्दी-जुकाम से लड़ने में मदद करता है। यह इम्यून सिस्टम को सही रखने का काम करता है। इसके साथ ही नींबू में पोटेशियम भी मौजूद होता है, जोकि दिमाग को संतुलित करने का काम करता है और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है।


    इम्यून सिस्टम को सही रखता है

  • 3 - वजन घटाने में करता है मदद

    जिन लोगों का वजन ज्यादा है, तो उसे कम करने के लिए रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीने से फायदा होता है। ये नुस्खा वजन कम करने वाले लोगों में काफी लोकप्रिय भी है।

    Iवजन घटाने में करता है मदद

  • 4 - सांसों की दुर्गंध हटाएं

    नींबू का रस सांसों की दुर्गध को दूर करने का काम करता है। बैक्टेरिया को भी खत्म करता है। जिन लोगों को सांसों की दुर्गंध की समस्या है, उनको बिना देरी किये ये कारगार नुस्खा अपना लेना चाहिए।


    सांसों की दुर्गंध हटाएं

  • 5 - लिवर को मज़बूत रखता है

    नींबू के रस में सिट्रिक एसिड पाया जाता है, जोकि एन्जाइम्स को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। यह लिवर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर करने का काम भी करता है।


    लिवर को मज़बूत रखता है

  • 6 - त्वचा के लिए फायदेमंद

    सुबह-सवेरे उठकर एक ग्लास गुनगुना नींबू पानी आपकी त्वचा को असाधारण ग्लो दे सकता है। इससे झुर्रियां बनने से रुकती हैं और साथ ही, पिंपल्स की समस्या से भी राहत पहुंचती है।


    त्वचा के लिए फायदेमंद

  • 7 -  सूजन कम होती है

    नींबू में आपके जोड़ों से यूरिक ऐसिड हटाने की क्षमता होती है। यूरिक ऐसिड शरीर में सूजन होने का एक बड़ा कारण है।

    सूजन कम होती है

  • 8 - दिमाग की शक्ति बढ़ाता है

    पोटेशियम और मैग्नीशियम के उच्च स्तर का हमारे दिमाग और तंत्रिका स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नींबू पानी आपको वह शक्ति दे सकता है जो आपको अवसाद और तनाव का सामना करने के लिए चाहिए होता है। इससे मानसिक स्पष्टता आती है और ध्यान एकाग्र करने में मदद मिलती है। इसलिए ये ड्रिंक स्टूडेंट्स और दिमागी काम अधिक करने वाले लोगों के लिए अमृत से कम नहीं है।


    दिमाग की शक्ति बढ़ाता है

  • 9 - कैंसर-विरोधी

    नींबू के ऑक्सीकरण रोधी तत्व कई प्रकार के कैंसर के खतरों को दूर करते हैं। वे ऐसिड को बेअसर करने में भी काफी अच्छे होते हैं। कैंसर ऐटिड वाली जगह में अधिक पनपता है। इससे आपके शरीर में कैंसर कोशिकाएं बढ़ नहीं पाती।


    कैंसर-विरोधी

  • 10 - कैफीन से दूरी

    कुछ लोग सुबह गुनगुना नींबू पानी पीकर कैफीन की आदत से छुटकारा भी पा लेते हैं। ये आपके शरीर को एक कप कॉफी जितना ही बूस्ट देता है। जिन लोगों की सेहत पर कैफीन का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है उनके लिए ये फायदेमंद विकल्प हो सकता है।


    कैफीन से दूरी

  • 11 - ताज़गी

    अलसुबह गुनगुना नींबू पानी आपको एक ताज़गीभरा दिन दे सकता है। इसमें थोड़ा शहद भी मिला लें। ये आपके सुबह के आलस को दूर करते आपको तरोताज़ा कर देगा। तो सोचना क्या, कल से जब सुबह उठें तो एक ग्लास गुनगुना नींबू पानी पियें, और इससे मिलने वाले ढेर सारे फायदे का लाभ उठाएं।

     


    ताज़गी
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जब हिलने लगे दांत तो आजमायें ये घरेलू उपचार

जब हिलने लगे दांत तो आजमायें ये घरेलू उपचार


अगर आपके दांतों में भी भोजन के दौरान दर्द और छूने पर ऐसा महसूस होता है कि दांत हिल रहा है तो समझ लीजिए कि आपको पैरीयोडेंटम समस्या हो गई है। लेकिन घबराएं नहीं क्योंकि कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर आसानी  से इसका उपचार किया जा सकता है।

  • 1 - हिलते दांतों के लिए घरेलू उपाय

    दांतों का  ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडेंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइबर्स टिश्यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्या होने लगती है। यह समस्या दांतों को बहुत ज्यादा रगड़ने, गम क्लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है। 


  • हिलते दांतों के लिए घरेलू उपाय

     
  • 2 - काली मिर्च और हल्दी का उपयोग से मसूढ़ों को बनायें मजबूत 

    इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्या होने पर काली मिर्च और हल्दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें। 
    काली मिर्च और हल्‍दी का जादू

  • 3 -स्वस्थ्य दांत के लिए पुदीने के तेल का करें उपयोग 

    पुदीने के तेल में दांतों की समस्याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्छे  से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा ज्यादा आराम पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इससे  कुल्ला करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 
    पुदीने का तेल

  • 4 - सरसों का तेल और नमक

    प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल को मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्द ही आराम मिलने लगेगा। 


  • सरसों का तेल और नमक

  • 5 - आंवला है दांत के लिए लाभकारी 

    आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक करने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला का जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला के रस से कुल्ला कर लें या इसे पी लें आराम मिलेगा ।


  • आंवला

  • 6 - लौंग के तेल के प्रयोग

    लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।
    लौंग के तेल के प्रयोग

  • 7 - अजवायन की पत्तियों का तेल

    अजवाइन की पत्ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है। 

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  • अजवायन की पत्तियों का तेल

  • 8 - नमक का प्रयोग करें

    नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देता है। समस्या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

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    नमक का प्रयोग करें

 

  • Disclaimer +

    इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध  सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। 
Posted by D.R. Singh on Saturday 9 April 2016
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