प्रोटीन के स्रोत जो आपको बनायें सेहतमंद
प्रोटीन : जीवन की मूलभूत जरूरत
मानव शरीर की हर कोशिकाओं में प्रोटीन होता है। प्रोटीन शरीर में पोषक तत्वों को तोड़कर अमीनो एसिड में बदलता है और यह कोशिकाओं के विकास और मरम्मत में सहायता करता है। इसके अलावा प्रोटीन शरीर का निर्माण करने वाले तत्वों में सबसे महत्वपूर्ण है। इसके सेवन से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर का संतुलन भी बेहतर होता है। मांस, अंडे और डेयरी उत्पाद प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोतों में से हैं। लेकिन इनको लेते समय सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल से सावधान रहने की जरूरत होती है। आइए हम आपको बताते है ऐसे ही कुछ प्रोटीन के बारे में जो आपको बनायेंगे सेहतमंद ।
1- व्हाइट मीट
व्हाइट मीट की तुलना में डार्क मीट में फैट थोड़ा ज्यादा होता है। इसलिए अच्छा लीन (चर्बीरहित) प्रोटीन पाने के लिए व्हाइट मीट को ज्यादा पसंद किया जाता है। मीट की त्वचा में बहुत अधिक मात्रा में सैचुरेटेड फैट होने के कारण इसको पकाते समय इसकी त्वचा को निकाल देना चाहिए। इससे आपको प्रोटीन की मात्रा बिना फैट के प्राप्त होगी।
2 - सी फ़ूड
फैट में कम, सीफूड प्रोटीन को बहुत अच्छा स्रोत है। मछली में फैट की मात्रा अधिक होती है, लेकिन इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
3 - पनीर
कम फैट वाले संस्करण के कारण पनीर को प्रोटीन का स्वस्थ स्रोत मानते है। इसमें कैल्शियम और विटामिन डी भी अच्छे मात्रा में मैजूद होता हैं। पनीर को आप कच्चा या सब्जियों के रूप में ले सकते हैं।
4 - अंडा
प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरपूर होने के कारण अंडे को पोषक तत्वों का पॉवरहाउस कहा जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक स्वस्थ इंसान एक दिन में एक अंडा बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के खा सकता है।
5 - बीन्स
बीन्स काली, सफेद, लाल, हरी और बहुत अधिक प्रकार की होती है। लेकिन सभी प्रकार की बीन्स में एक बात बहुत कॉमन है वह है प्रोटीन की उच्च मात्रा। स्वाद से भरपूर बीन्स में प्रोटीन के साथ ही फाइबर भी बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसके सेवन से आपको काफी देर तक भरा हुआ सा प्रतीत होता है। जिससे बीन्स आपको वजन कम करने में मदद करता है।
6 - सोया
सोया कई प्रोटीन स्रोतों की तुलना में बेहतर है, क्योंकि इससे पोषण के अलावा कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते है। सोया कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, एक स्वस्थ आहार योजना बनाए रखता है और दिल को स्वस्थ रखता है। सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थ शाकाहारी प्रोटीन के सर्वोच्च स्रोतों में से एक हैं।
7 - हरी पत्तेदार सब्जियां
वैसे तो सब्जियों में अंडे, व्हाइट मीट और पनीर के बराबर प्रोटीन नहीं होता है लेकिन इसमें कुछ मात्रा में प्रोटीन के साथ बहुत सारा एंटीऑक्सीडेंट और दिल को स्वस्थ रखने वाला फाइबर होता हे। इसके अलावा अधिक मात्रा में सब्जियां खाने से आपको अमीनो एसिड भी भरपूर मात्रा में मिलता है।
8 - बादाम
नट्स विशेष रूप से बादाम प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत है। भरपूर मात्रा में प्रोटीन होने के अलावा बादाम विटामिन, मिनरल और फाइबर से भी भरपूर होता है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते है। मिठाई और व्यंजनों में बादाम के इस्तेमाल से यह अतिरिक्त स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट हो जाता है।
9 - पीनट बटर
आप अपने आहार में पीनट बटर को जोड़कर प्रोटीन की एक अच्छी खुराक प्राप्त कर सकते हैं। पीनट बटर को दिल की सहायता करने वाला, स्वस्थ मल त्याग को बढ़ावा देने वाला और हृदय रोग विकसित होने का खतरा कम करने के लिए जाना जाता है।
10 - सप्लीमेंट्स
जिन लोगों को अपने आहार से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल रहा हैं, उन लोगों के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स एक अच्छा विकल्प है। ज्यादातर प्रोटीन की प्राप्ति आपको बीन्स और सोया से हो सकती है। यह उन लोगों के लिए भी मददगार है, जो मसल्स के निर्माण और उन्हें बनाए रखने के लिए कोशिश कर रहे हैं।
11 - फॉर्मूला 1 पौष्टिक शेक मिक्स
स्वादिष्ट हर्बलाइफ ® प्रोटीन शेक -आवश्यक विटामिनों , खनिजों और पोषक तत्वों से भरपूर - व्यस्त और भ्रमण शील व्यक्ति के लिए उत्तम हैं । यदि आप शीघ्र और पोषक भोजन चाहते हैं, तो आपको दोनों ही तब मिलेंगे जब आप अपनी भूख को शांत करने के लिए और अपने वजन को प्रबंधित करने के लिए हर्बलाइफ® फॉर्मूला 1 शेक के लिए पहुंचेंगे । प्रोटीन की शक्ति से भूख को नियंत्रित करें तथा ऊर्जावान रहें । हर्बलाइफ ® प्रोटीन उत्पाद से खुद को बढ़ावा देने के लिए तीन अच्छे कारण हैं : भूख शांत करना और नियंत्रित करना; निम्न वसा वाली प्रोटीन के साथ पर्याप्त प्रोटीन सेवन करने का सपोर्ट ; दुबली मांसपेशियों को बनाना और रखरखाव करना ।
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इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।
Posted by D.R. Singh on Sunday 12 August 2018
स्वस्थ्य जीवनशैली (हेल्दी लाइफस्टाइल) के लिए जरूरी है अच्छी और सेहतमंद नींद

अच्छी नींद की आदत अच्छी सेहत और बीमारियों से दूर रहने में मदद करती है। वैसे तो हम सभी हर रोज सोते हैं, लेकिन अपने व्यस्त दिनचर्या के कारण बहुत कम लोग अच्छी और सेहतमंद नींद ले पाते हैं। सेहमंत नींद के कई महत्व हैं, आपके लिए इनके बारे में जानना फायदेमंद हो सकता है।
दिनभर चुस्त रहने के लिए सेहतमंद नींद जरूरी हैं। सबसे ज़्यादा जरूरी है नींद का समय निर्धारित होना। पूरे सप्ताह एक ही वक्त पर सोना और उठना सबसे उत्तम होता है। अपने शरीर की जरूरत के अनुसार सोएं, न कि समय को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा या कम।
अपने पूरे दिन का शेड्यूल, आप क्या खाते-पीते हैं, कौन-सी दवाएं लेते हैं, पूरा दिन कितना व्यस्त रहते हैं और शाम किन कामों में निकलती है आदि बातों पर आपकी नींद की गुणवत्ता निर्भर करती है। कुछ चीजों में थोड़ा-सा भी बदलाव आपकी आरामदायक नींद को बेचैन रात में बदल सकता है।
इस बारे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मानद महासचिव डॉ. के. के. अग्रवाल का कहाना है कि, "देश के ज़्यादातर लोगों को यह जानकारी नहीं है कि मोटापा, तनाव, हाईपरटेंशन, डायबिटीज़, दिल के रोग आदि बीमारियां अनियमित निंद्रा से जुड़ी हुई हैं। नींद की अनियमितता रिश्तों में तनाव, कामकाज की क्षमता पर प्रभाव, दुर्घटनाओं, याददाश्त और अन्य कमजोरियों और खराब किस्म के जीवन का कारण बनती हैं।"
उन्होंने कहा, "आज की पीढ़ी तीन से पांच घंटे सोती है और सप्ताह के अंत में 14 घंटे सोकर इस कमी को पूरा करती है। यह उनकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।" डॉ. अग्रवाल ने कहा, "आज के युवा ज़्यादा देर जागने के लिए कैफीन और एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहते हैं, जो उनकी कार्य क्षमता पर प्रतिकूल असर डालते हैं। इसलिए हमारी रोजाना जिंदगी और सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक होना और जरूरी कदम उठाना बेहद आवश्यक हो जाता है।"
अच्छी और सेहतमंद नींद के लिए इन बातों का रखें ख़ास ध्यानः
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हर रोज एक ही समय पर उठें
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अपनी सोने की जगह को रोज़-रोज़ न बदलें
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अपने बेडरुम से टीवी, कंप्यूटर, स्मार्टफोन या टैबलेट और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीजें दूर रखें
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बहुत जरूरी हो तभी दिन में झपकी लें। बहुत ज़्यादा नींद आने पर दोपहर में ली गई झपकी रात में हुई नींद की कमी को पूरा करने के लिए बेहतर विकल्प है, लेकिन यही झपकी आपके सोने की क्रिया को अस्त-व्यस्त भी कर सकती है।
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अगर फिर भी झपकी की जरूरत हो तो इसे 20 से 30 मिनट तक ही सीमित रखें
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दोपहर के बाद कैफीन से दूर रहें और शराब भी बहुत कम लें
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कैफीन आपके शरीर में 12 घंटे तक मौजूद रह सकती है।
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शराब नींद लाने का काम कर सकती है, लेकिन यह नींद को बिगाड़ भी कर सकती है
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नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से तीन घंटे पहले न करें
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हर रोज एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें
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कामकाजी दिनों में नियमित व्यायाम जरूर करें और जरूरत पड़ने पर सप्ताह के अंत में नींद की कमी पूरा करें।
Disclaimer +
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Posted by D.R. Singh on Sunday 12 August 2018
क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज़ से आपकी आँखे कैसे प्रभावित होती है ?
दुनिया भर में बहुत से लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं।आज - कल यह बच्चों में भी होता है, पर बच्चों में यह बहुत कम होता है जब कि युवा वर्ग में शुगर होना आम बात है। यह किसी व्यक्ति के डायबिटीज़ होने का पता चल जाता है तो उसे डॉक्टर की सलाह का ठीक तरह से पालन करना चाहिए। इसके साथ ही उसे नियमित रूप से नेत्र विशेषज्ञ से भी संपर्क करना चाहिए। आप सोच रहे होंगें कि डायबिटीज़ का आँखों के डॉक्टर से क्या सम्बन्ध है, लेकिन शायद आपको नहीं मालूम है कि डायबिटीज़ आँखों को कैसे प्रभावित करती है, आइये हम जानते हैं कि डायबिटीज आपकी आँखों को कैसे खराब कर सकता है।
1. डायबेटिक रेटिनोपैथी: -
डायबेटिक रेटिनोपैथी आँखों की एक खतरनाक बीमारी है। यह रेटिना की रुधिर वाहनियों को प्रभावित करता है, इससे ये ब्लॉक होकर या लीक होकर आपकी नजर को खराब कर सकता है।
2. प्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी :-
यह डायबेटिक रेटिनोपैथी का ही एक प्रकार है जिसमें रेटिना में एक अनावश्यक नस बढ़ जाती है। इसकी 4 स्टेज होती हैं जिनमें से 3 स्टेज नॉन- प्रोलिफेरेटिव होती हैं लेकिन इनमें भी आवश्यक नस में सूजन या ब्लोकेज होता है और चौथी स्टेज आँखों में प्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी है।
3. डायबेटिक मैक्युलोपैथी: -
यह भी डायबिटीज़ से होने वाली आँखों की समस्या है, जिसमें मैकूला प्रभावित होता है। हालांकि इसमें चारों और की नजर ठीक रहती है लेकिन एक सामने की नजर इससे प्रभावित होती है। इससे व्यक्ति सब कुछ देख सकता है लेकिन सामने वाले का चेहरा सही से दिखाई नहीं देती हैं।
4. मोतियाबिंद:
मोतियाबिंद में आँख के लैंस के आगे रुकावट आ जाती है जिससे दिखाई नहीं देता है, यह समस्या भी डायबिटीज़ के कारण हो सकती है। हालांकि यह कई कारणों से हो सकता है लेकिन डायबिटीज़ में इनका खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या उम्र के एक पड़ाव पर खास तौर पर होती है, जिसे लेजर ऑपरेशन से ठीक किया जा सकता है।
5. ग्लूकोमा:
डायबिटीज़ के मरीजों में ग्लूकोमा का खतरा भी बढ़ जाता है। इसमें आँखों का तरल पदार्थ बाहर नहीं निकल पाता है जिससे आँखों पर दबाव बढ़ता है। इससे नसें खराब होती हैं और आँखों की समस्या होती है।
6. कई कारणों से कम दिखना:
डायबिटीज़ के मरीज को पूरा और साफ ना दिखने की समस्या हो सकती है। उन्हें धुंधला और दो-दो चीजें दिखने, तेज रोशनी में रेटिना को चोट पहुँचना, काले धब्बे दिखना, लाल धब्बे, आँखों में धारियाँ आदि समस्याएँ हो सकती हैं, जिनसे खून आना या आँखों की नजर के आगे पर्दा छा सकता है और आँखें खराब हो सकती हैं।
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Posted by D.R. Singh on Sunday 12 August 2018
Eggs: Back On the Plate?
Eggs: Back On the Plate?
Writen by Susan Bowerman MS, RD, CSSD, FAND

Eggs on a heart-healthy diet? New guidelines say eggs are okay.
Every five years or so, the U.S. government updates its Dietary Guidelines for Americans. One of the more newsworthy changes in the most recent edition, released at the beginning of 2016, was that an upper daily limit of cholesterol intake was removed, which was great news for egg lovers.
The new guidelines on cholesterol consumption were a nod to evidence that dietary cholesterol has very little effect on the level of cholesterol in the bloodstream. If you read the entire report, however, it also advises to eat “as little dietary cholesterol as possible while consuming a healthy diet,” which sounds like a contradiction.
But this recommendation was made because many foods that are high in cholesterol – like fatty meats, cheese and high-fat dairy products – are also high in saturated fat, and the recommendation to limit saturated fat intake still stands in the most recent guidelines.
Eggs are somewhat of an exception because, although they do contain cholesterol, their saturated fat content is relatively low.
Eggs are one of the most nutritious and versatile foods around. Not only do they offer up a lot of nutrition in a small package, but their delicious mild flavor also makes them adaptable to all sorts of dishes that can be eaten at any time of the day. And, they’re also somewhat less perishable than fresh meat, fish or poultry – properly refrigerated, eggs can stay fresh for about three weeks after you bring them home.
A whole egg has about 80 calories, about 5 grams of fat, most of which is the healthy monounsaturated type, and less than 200 mg of cholesterol. And a single egg packs about 6 grams of protein, with a bit more found in the white than the yolk. If you opt to eat only the egg whites and have, for example, four egg whites in an omelet, you’ll be taking in about 14 grams of protein, no fat and no cholesterol – all for around 70 calories.
Eggs are considered to be one of the highest quality proteins around. Eggs contain all the essential amino acids – the building blocks your body uses to construct vital proteins like hormones, enzymes and muscle tissue. Egg yolks contain lutein and zeaxanthin, two naturally occurring pigments that help protect the eyes from ultraviolet radiation, and choline, a nutrient that supports the health of cell membranes. Egg yolks are also one of the few natural sources of vitamin D. A whole egg contains about 10% of the Daily Value for Vitamin D, a nutrient that helps the body to absorb calcium.
If you think of eggs solely as breakfast food, think again. Veggie omelets can make a light but satisfying dinner, scrambled eggs are great in a wrap for lunch, and a sliced hardboiled egg on a whole grain cracker makes a terrific snack.
With all they’ve got going for them, here’s something else to consider about eggs, you don’t even need a skillet to cook them. Next time you’re in a hurry in the morning, try this: Spray a coffee mug with pan spray; then crack in your eggs or egg whites. Beat quickly with a fork, and microwave on high for about a minute and a half, stirring once halfway through the cooking process. The eggs cook up light and fluffy, and while they’re delicious as is, you can also top them with a few slices of avocado or a spoonful of salsa for a quick meal or snack.
Susan Bowerman is Director of Nutrition Training at Herbalife. Susan is a Registered Dietitian and a Board-Certified Specialist in Sports Dietetics.
Posted by D.R. Singh on Sunday 12 August 2018
जानिए, रोज आपको कितने घंटे की नींद लेनी चाहिए

न्यूयॉर्क: बहुत अधिक या बहुत कम नींद का स्वास्थ्य पर परिणामों के मददेनजर, अमेरिकी नेशनल स्लीप फाउंडेशन ने किसे कितनी नींद लेने की जरूरत है, इस पर एक सिफारिश पेश की है। शोधकर्ताओं की सिफारिशों के मुताबिक, नवजातों (तीन महीने की आयु) को प्रतिदिन 14-17 घंटे, वहीं शिशुओं (चार से 11 महीने की आयु) को कम से कम 12-15 घंटे की नींद लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किशोरों (14-17 वर्ष की आयु) को कम से कम 8-10 घंटे, जबकि वयस्कों को रोजाना 7-9 घंटे सोना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, माता-पिता को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके स्कूल जाने वाले बच्चे (छह से 13 वर्ष की आयु) नौ घंटे से कम नींद न लें। उनके लिए 11 घंटे तक की नींद सर्वोत्तम है। वहीं, एक से दो वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 11-14 घंटे, जबकि तीन से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को 11-13 घंटे की नींद लेने की सिफारिश की गई है। यह अध्ययन पत्रिका स्लीप हेल्थ ( जर्नल ऑफ द नेशनल स्लीप फाउंडेशन) में प्रकाशित हुआ है।
गहरी नींद के आसान उपाय :-
रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।
* अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आ रही हो या फिर मन में घबराहट सी हो तब अपना मन पसंद संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य या स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें पढ़ें, ऐसा करने से मन में शांति का भाव आएगा, जो गहरी नींद में काफी सहायक होता है।
* अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में आपको सोने में आराम महसूस होता हो, उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें। अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है।
* अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल से धोकर बिस्तर पर जाना चाहिए। इससे नींद आने में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।
* सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें। सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है, जिस कारण नींद नहीं आती।
* अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है, नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त शवासन करें। इससे पूरे शरीर की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण आसानी से नींद आ जाती है।
* अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है, तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है।
* सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं, जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।
Posted by D.R. Singh on Sunday 12 August 2018










