यूं पाएं खर्राटों से मुक्ति
खर्राटे भले ही आपकी गहरी नींद का संकेत हों, लेकिन आपके साथ रहने वाले शख्स को इनसे काफी परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही खर्राटे कई बीमारियों का इशारा भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप इनसे निजात पाने की कोशिश करें।जर्मन ऑटोलैरिंगोलॉजिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक यदि सोते समय शरीर के ऊपरी हिस्से को हल्की सी ऊंची स्थिति में रखा जाए तो खर्राटों पर काबू पाया जा सकता है। एसोसिएशन के अनुसार वजन कम करने से भी इसमें मदद मिल सकती है।
क्या होेते हैं खर्राटे
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक यदि ये उपाय खर्राटे रोकने में कारगर नहीं होते हैं तो आप निद्रा श्वासरोध बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं।नाक और गले के एक जगह खुलने के स्थान पर सॉफ्ट टिश्यू के कारण सांस लेने का रास्ता आंशिक तौर पर बंद होने से आवाज आने लगती है। वैसे यह अभी तक तय नहीं हो पाया है कि किस वजह से सांस लेने के रास्ते के टिश्यू पर दबाव पड़ता है। इस बीमारी में सांस लेने के दौरान बीच-बीच में श्वास लेने की क्रिया खतरनाक रूप से रुक जाती है। इस बीमारी से पीडित लोगों को चिकित्सक कंटीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) उपकरण के उपयोग की सलाह देते हैं। इस उपकरण में एक विशेष प्रकार का मास्क होता है। कभी-कभी तालु के कोमल ऊतक को कठोर बनाने के लिए एक छोटी सी शल्य चिकित्सा की जाती है। जर्मनी के ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस चिकित्सा से मरीज अच्छी नींद ले पाते हैं और दिनभर थकान महसूस नहीं करते हैं।
कारण
खर्राटों का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे जीभ का बड़ा होना, पुरानी सर्दी, नाक में मस्से होना या नाक का पर्दा सीधा न होना आदि कारणों से सांस में रुकावट पैदा हो जाती है। अधिक मोटापे के कारण भी खर्राटों की शिकायत हो सकती है। खर्राटे अधिक आने पर पालीसाइटमियो नामक रोग भी हो सकता है। इस रोग में रक्त कणों की संख्या बढ़ने के कारण खून में गांठे पड़ सकती हैं। यदि ये गाँठें उन रक्त वाहिनियों में पहुंच जाएं जो हृदय में रक्त ले जाती हैं तो व्यक्ति को हार्ट अटैक तथा ब्रेन हेमरेज जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
इलाज
आपको इसकी समस्या से जल्द निजात पाने के लिए डॉक्टर की सलाह के साथ अपने वजन को कट्रोल में रखना होगा। कुछ मरीजों को करवट लेकर सोने से खर्राटे नहीं आते जबकि कुछ को नॉजल ड्रॉप्स डालने से आराम मिलता है। कुछ मरीजों को मशीन लगाने से भी आराम मिलता है। परेशानी बढ़ने पर गले का ऑपरेशन भी किया जाता है। यदि समस्या बहुत ज्यादा ही गंभीर हो तो गले में ट्रेकिया में छेद कर पीड़ित व्यक्ति को राहत दी जाती है।
क्या आपके घर में भी लोग सोते वक्त आपके खर्राटों से परेशान हैं? या आए दिन आपको अपने खर्राटों की वजह से शर्मिंदगी उठानी पड़ती है? इसके बावजूद आप अपनी इस समस्या से छुटकारा नहीं पा सके हैं? तो चलिए हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताते हैं जिससे आप काफी हद तक इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
अलग-अलग पोजिशन अपनाएं
वैसे तो पीठ के बल सोना ही सोने का आदर्श तरीका है लेकिन कई बार इस मुद्रा में सोने से खर्राटे की आशंका बढ़ जाती है। इस मुद्रा में तालु व जीभ गले के ऊपरी भाग पर होते हैं। इससे ऊंची पिच में ध्वनि उत्पन्न होती है और यह खर्राटों में तब्दील हो जाती है। आप अगर करवट के बल सोएंगे तो खर्राटों की आशंका कम होगी।
वजन घटाएं
आपने कभी गौर किया हो तो हमेशा खर्राटे लेने वाले लोग अधिकतर मोटापे के शिकार हैं। ऐसे में गले के आस-पास बहुत अधिक वसा युक्त कोशिकाएं जमा हो जाती हैं, जिनसे गले में सिकुड़न होती है और खर्राटे की ध्वनि निकलती है। यह हवा के रास्ते को भी रोकता है जिससे भी सोते वक्त खर्राटे अधिक होते हैं। तो अगर आप खर्राटे से छुटकारा चाहते हैं तो वजन जरूर घटाएं।
सोने से पहले न लें अल्कोहल
कई दर्द निवारक दवाओं की तरह ही अल्कोहल भी शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को कम करती है और उन्हें विस्तार देती है। कई बार बहुत अधिक अल्कोहल के सेवन से गले की मांसपेशियां फैल जाती हैं जिससे खर्राटे उत्पन्न हो सकते हैं। तो सोते वक्त हो सकें तो अल्कोहल से बचें या फिर सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें।
धूम्रपान से बचें
धूम्रपान का फेफड़े पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे फेफड़े की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कभी-कभी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को सोते वक्त ऑक्सीजन की कमी लगती है। इस स्थिति को स्लीप ऐप्नीआ यानी निद्रा अश्वसन कहते हैं। इस स्थिति में कई बार ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए भी शरीर खर्राटे लेता है।
साइनस भी है वजह
खर्राटे की एक वजह साइनस बढ़ने से नाक के छिद्रों का जाम हो जाना भी हो सकती है। इतना ही नहीं, खर्राटे की ध्वनि बढ़ने पर भी नाक के रास्ते का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अगर आप साइनस के मरीज हैं तो सावधानियां हमेशा बरतें। यदि आपको जुकाम हुआ है या साइनस बढ़ने से परेशान हैं तो सोने के पहले भाप जरूर लें जिससे सारी गंदगी बाहर आ जाए और सांस लेने में आसानी हो।
तकिये पर भी दें ध्यान
अगर आप अपनी तकिया की खोल को समय-समय पर नहीं बदलते या साफ नहीं करते तो हो सकता है कि आप के खर्राटों की एक वजह यह भी हो। कई बार सिर से रूसी या बाल तकिया पर गिरे होते हैं जो कई सूक्ष्म जीवों के लिए जमीन तैयार कर देते हैं। जब हम सांस लेते हैं तो ये एलर्जी शरीर की श्वास संबंधी क्षमता को खत्म कर देती है जिससे निद्रा अश्वसन या स्लीप ऐपनीआ की समस्या होती है और खर्राटे तेज हो जाते हैं।
ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं
जब आपके शरीर में पानी की कमी होती है तो नाक के रास्ते की नमी सूख जाती है। ऐसे में साइनस हवा की गति को श्वास तंत्र में पहुंचने के बीच में सहयोग नहीं कर पाता। ऐसे में सांस लेना कठिन हो जाता है और खर्राटे की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। ऐसे में पूरे दिन भरपूर मात्रा में पानी पीएं, सेहतमंद रहें और खर्राटे से कोसों दूर रहें।
खर्राटों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है, अब खर्राटों का इलाज महज पांच मिनट में हो सकता है। बिना सर्जरी के इस इलाज में खर्राटों का ही नहीं, खर्राटों से हो सकने वाली दिल की बीमारियों को भी रोका जा सकेगा। डॉक्टरों के अनुसार खर्राटों से व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का मरीज भी बन सकता है और हार्ट पेशेंट भी। एक मेडिकल सर्वेक्षण के मुताबिक दुनियाभर में आधी से अधिक आबादी खर्राटे लेती है, लेकिन इनमें से करीब 25 फीसदी लोग बहुत गहरे और तेज आवाज में खर्राटे लेते हैं। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि मोटापे या हाइपोथाइरॉइडिज्म से ग्रस्त लोगों में खर्राटे लेने या खर्राटों के कारण दिल की बीमारी होने की संभावना अधिक होती है।
यह है नवीनतम इलाज
जीएमएसएच-१६ के ईएनटी विभाग में विशेषज्ञ डॉ. वीके शर्मा के मुताबिक रेडियो फ्रिक्वेंसी ट्रीटमेंट नवीनतम इलाज है। इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी के इस्तेमाल से सांस के रास्ते में रुकावट बनने वाले टिश्यू को रास्ते से हटाया जाता है। रेडियो फ्रिक्वेंसी की मदद से 95 डिग्री तक तापमान बनाकर गरमी पैदा की जाती है जो सामान्य टिश्यू को नुकसान पहुंचाए बिना टारगेट टिश्यू के वॉल्यूम को कम कर देती है। इस प्रक्रिया में ५ से ७ मिनट का समय ही लगता है और मरीज उसी दिन काम पर लौट सकता है।
पहले क्या था इलाज
डॉ. वीके शर्मा के मुताबिक खर्राटों के इलाज के कई तरीके इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। इनमें दवाओं से लेकर नाक पर स्ट्रैप, गले की नली को खुला रखने का क्लिप और लेजर के जरिये सर्जरी किया जाना भी था।
यह करें, नहीं आएंगे खर्राटे
पीठ के बल सोने और लेटने से बचें
करवट लेकर सोएं।
वजन कम करना सबसे जरूरी और असरदार है।
जुकाम होने पर पूरा इलाज कराएं।
नशा करने से बचें।
नींद लाने वाली दवाओं के असर से भी खर्राटे आते हैं।
Disclaimer +
इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है । इस लेख में उपलब्ध सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।
Posted by D.R. Singh on Wednesday 24 February 2016
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