गठिया रोग व उसका उपचार

घुटनों के गठिया रोग का उपचार

Physiotherapy For Knee Pain

ओस्टियो आर्थराईटिस एक आम प्रकार का घुटनों का आर्थराईटिस होता है और इसे जोड़ों का अपकर्षक रोग भी कहा जाता है। घुटनों का संधिशोथ चबनी हड्डी की क्रमिक घिसाई के कारण होता है। घुटनों का संधिशोथ आम तौर से 50 वर्षों से अधिक आयु के रोगियों को अपना शिकार बनता है। और यह रोग उनमें अधिक पाया जाता  है जिनका वज़न आवश्यकता से अधिक होता है। यह रोग अनुवांशिक भी होता है, मतलब कि पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहता है। घुटनों के संधिशोथ के अन्य कारण हैं, घुटने में चोट, अस्थिबंध को हानि, और जोड़ के आसपास की हड्डी का टूटना।

घुटनों के संधिशोथ के लक्षण

घुटनों के संधिशोथ के लक्षण संधिशोथ की अवस्था की बदतरी के साथ उजागर होते जाते हैं। लेकिन मज़े की बात यह है कि  लक्षण समय के साथ बढ़ते नहीं हैं। रोगी अक्सर अच्छे और बुरे समय के बारे में बात करते हैं, या मौसम के साथ लक्षणों में बदलाव महसूस करते हैं। घुटनों के आर्थराइटिस के आम लक्षण इस प्रकार हैं।

१ -  गतिविधि के कारण पीड़ा।२ -  घुटनों में अकड़न।3  - जोड़ों में सूजन।4 - "जोड़ जवाब दे जाएगा" का एहसास।5 - जोड़ों की विकृति। 

घुटनों के आर्थराइटिस के उपचार की शुरुआत शारीरिक जांच और एक्स रे से करनी चाहिए और अगर आवश्यकता पड़े तो ऑपरेशन भी किया जा सकता है। हर रोगी पर एक ही तरह का इलाज कारगर नहीं होता, और अपने लिए सही इलाज की सलाह अपने चिकित्सक से लेना ज़रूरी होता है।
घुटनों के आर्थ राइटिस के उपचार के लिए कुछ विकल्प नीचे दिए गए हैं।

वज़न कम करना

घुटनों के आर्थराइटिस के उपचार के लिए कदाचित यह एक अति महत्वपूर्ण पर कम प्रयोग में लाया जानेवाला एक अचूक तरीका है। जोड़ों को जितना कम वज़न उठाना पड़े, उतनी ही कोई कार्य करते समय जोड़ों में पीड़ा कम होती है।अपनी कुछ गतिविधियाँ कम करने या उनपर नियंत्रण करने से, और व्यायाम के नए तरीकों के बारे में जानने से काफी सहायता मिल सकती है।एक छड़ी या एक ही बैसाखी का प्रयोग करने से भी काफी लाभ मिल सकता है।जलन रोधी औषधियां के सेवन से भी जोड़ों की पीड़ा काफी हद तक कम हो जाती है।

अन्य तरीके

कोर्टीसोन इंजेक्शन को लगवाने से जोड़ों की जलन और पीड़ा कम हो जाती है। घुटनों के आर्थराइटिस के उपचार के लिए ग्लुकोसैमाइन सुरक्षित और असरदार औषधि मानी जाती है। घुटनों की आरथरोस्कोपी कुछ ख़ास लक्षणों में ही कारगर साबित होती है। घुटनों की ओस्टियोटोमी सीमित रूप से आर्थराइटिस से ग्रसित कम उम्र के रोगियों पर ही असर करता है। पूर्ण रूप से घुटनों के बदलाव की सर्जरी की प्रक्रिया से चबनी हड्डी को निकालकर धातु और प्लास्टिक की चबनी हड्डी के आकार की वस्तु डाली जाती है।

आंशिक रूप से घुटने के बदलाव की सर्जरी की प्रक्रिया से घुटने के एक ही भाग को बदला जाता है। यह सीमित रूप से घुटनों के आर्थराइटिस से ग्रसित रोगियों के लिए सर्जरी का एक अच्छा विकल्प है।

घुटने के दर्द से मुक्ति पाने के लिए फिजियोथेरेपी है सबसे ज्‍यादा असरकारक

 घुटनों के दर्द से मुक्ति पाने के लिए फिजियोथेरेपी कारगर सबित होती है। 

घुटनों में दर्द की समस्या आम हो गई है। इसके असहनीय दर्द से मुक्ति पाने के लिए लोग घुटनों की सर्जरी तक कराते हैं, लेकिन हाल में हुए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अनावश्यक सर्जरी की अपेक्षा यदि घुटनों की फिजियोथेरेपी कराई जाए तो यह इलाज में ज्यादा कारगर हो सकता है।

आजकल आथ्रेस्कोपिक सर्जरी आम बात हो गई है, लेकिन फिनलैंड में हुए इस अध्ययन की मानें तो हजारों लोग अनावश्यक रूप से ये सर्जरी कराते हैं। अध्ययन के मुताबिक, इस सर्जरी की संख्या कम होनी चाहिए। क्योंकि फिजियोथेरेपी इस रोग के निदान का एक अच्छा विकल्प मौजूद है।

हालांकि फिनलैंड के शोध में इस सर्जरी को कारगर माना गया है, लेकिन उनके मुताबिक सर्जरी कम उम्र के रोगियों पर की जाना चाहिए है। शोध  के अनुसार 80 प्रतिशत मामलों में सर्जरी उतनी कारगर साबित नहीं होती।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्थोपेडिक के सर्जन, डेविड जेवसेवर ने इस संदर्भ में कहा है कि यह एक जाना माना अध्ययन है। यह अध्ययन कई शोध को विश्वसनीयता देता है जिसने यह दिखाया है कि मरीजों पर आथ्रेस्कोपी हमेशा बेहतर साबित नहीं रहती।

इस अध्ययन के लिए 5 अस्पतालों और 35 से 45 साल के 146 मरीजों को शामिल किया गया।

आर्थराइटिस के दर्द से छुटकारा पाने के लिए कुछ लाभकारी बातें 

स्‍त्रियों में पुरुषों की अपेक्षा आर्थराइटिस होने का खतरा ज्यादा होता है। इससे बचने के लिए विशेषज्ञ हमें अपने आहार में ऐसे फलों और सब्जियों को शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेन्ट्स और पौष्टिक तत्व उचित मात्रा में मौजूद हों। कुछ खाद्य-पदार्थो का सेवन और कुछ बातों का ध्यान रखकर इस रोग पर काबू पाया जाया सकता है। 

 अदरक का उपयोग करें और दर्द से आराम पायें 

सदियों से अदरक को दर्द निवारक के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। यह जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए बहुत कारगर है। रोजाना दिन में दो बार अदरक का सेवन करने से आपको दर्द को दूर करने में मदद मिलती है।

ताजा फल का सेवन करने से होता है लाभ 

ताजे फलों और सब्जियों के रस जोड़ों के दर्द में अद्भुत उपचार हैं। ऐसा माना जाता है कि लहसुन, मौसमी, संतरा, गाजर और चुकंदर के रस का पर्याप्त सेवन इस रोग से निजात दिलाने में सहायक है।

फूल गोभी का रस है फायदेमंद 

फूल गोभी में मौजूद तत्‍व जोड़ों के दर्द को कम करने में बहुत मदद करते हैं। माना जाता है कि रोजाना इसका रस पीने से जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है। यदि आपको थायराइड की समस्‍या हो, तो एक बार डॉक्‍टर से सलाह करके ही फूल गोभी का सेवन करें।

नींबू के रस से मालिश से मिलाता है आराम 

नींबू का रस बहुत अच्‍छा दर्द निवारक माना जाता है। जोड़ों पर नींबू के रस की मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है। आप चाहें तो रोजाना नींबू पानी का सेवन भी कर सकते हैं। इससे जोड़ों की सूजन कम होती है और दर्द कम होता है।

गर्म पानी से मिलती है राहत

जोड़ों में दर्द के समय या बाद में गर्म पानी के टब में लेटने से काफी राहत मिलती है। इसके साथ ही यदि आप चाहें तो गर्म पानी के शॉवर के नीचे बैठें। आपको निश्चित ही राहत मिलेगी। और दर्द कम हो जाएगा।

बाम के ज्यादा प्रयोग से हो सकता है नुकसान

दर्द घटाने के बाम, क्रीम आदि बार-बार इस्तेमाल न करें। इनके द्वारा पैदा हुई गर्मी से राहत तो मिलती है, पर धीरे-धीरे ये नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए लंबे समय तक बाम का इस्‍तेमाल आपको नुकसान पहुंचा सकता है। कभी भी दर्द निवारक बाम लगाकर उस पर सेंक न करें। इससे जलन बहुत बढ़ सकती है।

जोड़ों के दर्द के लिए चमत्कारिक दवा, तेल या मालिश वगैरह के दावे बहुत किए जाते हैं। इन्‍हें आंख मूंदकर इस्‍तेमाल करने से बचें। अकसर ऐसे दावे सच नहीं निकलते और बाद में आपको पछताना पड़ सकता है।

घुटनों के दर्द को दूर करने के 4 जरूरी एक्सरसाइज

जोड़ों में दर्द का एक आम समस्या है, जिसका प्रमुख कारण अकसर आर्थराइटिस, जिसे गठिया भी कहा जाता है, होता है। विशेषकर 60 की उम्र के बाद यह ज्यादा परेशान करता है। इसमें रोगी के हड्डियों में सूजन, अकड़न और जोड़ों में दर्द होता है। ऐसा जोड़ों में यूरिक एसिड जमने की वजह से होता है। यूरिक एसिड के जमने से मरीज के जोड़ों में गाठें भी बन जाती हैं। अधिकतर मामलों में यह समस्या अधिक उम्र के लोगों में ही होता है। इसके अलावा सर्दियों में लोगों की जीवनशैली बदलती है। गर्मियों के मौसम के मुकाबले इस मौसम में खान-पान बढ़ जाता है, और सुबह की एक्सरसाइज या वाकिंग नहीं हो पाती, सुबह लेट उठना, धूप न होना आदि कारणों से आर्थराइटिस की समस्या बढ़ने लगती है। लेकिन घुटनों के दर्द की इस समस्या से कुछ एक्सरासइज आपको आराम दिला सकते हैं।

इसके अलावा आमतौर पर घुटने का दर्द या तो किसी दुर्घटना में लगी चोट या फिर घुटने पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ने से होता है। अस्थिरज्जु के फटने से भी घुटने का दर्द हो सकता है। कई बार हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे वॉकिंग, रनिंग, जंपिंग या सीढ़ियां चढ़ने से घुटने पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ सकता है। और घुटने की अस्थिरज्जु में टूट-फूट हो जाती है, जिससे जोड़ों का दर्द हो सकता है। इसलिये घुटनों के लिये कुछ नियमित व्यायाम जरूरी होता है। ताकी वे मजबूत रहें और इस प्रकार की समस्याओं से बचे रहें।

१ - स्ट्रेचिंग करें  

घुटनों के दर्द से आराम पाने के लिए मसल स्ट्रेचिंग एक कारगर एक्सरसाइज है। ऐसी कई स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज हैं जिन्हें करना घुटने के लिए काफी लाभदायक होता हैं। ऐसी ही एक एक्सरसाइज हैम्स्ट्रिंग स्ट्रेचिंग भी हैस जिससे घुटनों के मसल ढीले होते हैं। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आप एक पैर आगे करें और दूसरे पैर के घुटने को इतना मोड़ें कि दबाव महसूस होने लगें। आप ऐसे ही कुछ और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी कर सकते हैं।

२ - योगासन करें

अगर आपका घुटना किसी वजह से चोटिल हो गया है तो आप योगा कर सकते हैं। योग करने से मसल्स रीलैक्स होते हैं और घुटने पर से दबाव व तनाव भी कम होता है। ऐसे कई योगआसन हैं जो खासतौर पर घुटने को आराम पहुंचाने के लिए होते है। अन्य एक्सरसाइज की तुलना में योगा का असर अधिक समय तक रहता है। यदि आप नियमित रूप से सूर्यनमस्कार करें तो भी घुटने का दर्द काफी कम होता है।

३ - स्टेप अप

स्टेपिंग या स्टेप अप्स एक प्रकार की कार्डियो एक्सरसाइज होती है। यह एक्सरसाइज दिल की धड़कन को बढ़ाती है, शरीर में गर्मी पैदा करती है और पूरे शरीर को ऊर्जावान भी बनाती है। स्टेप अप करते समय अपने घुटने को न मोड़ें, बल्कि उसे पूरी तरह सीधा रखें। साथ ही एक समान गति से एक मिनट तक लगातार स्टेप अप करने से घुटने को काफी फायदा होता है। यदि आप किसी प्रकार की घुटने की चोट से जूझ रहें हैं तो इस एक्सरसाइज को कर सकते हैं।

४ - मैट एक्सरसाइज करें

कुछ मैट एक्सरसाइज जैसे लेग लिफ्ट व नी लिफ्ट आदि में घुटने के मसल्स स्ट्रेच होते हैं, जिससे घुटने के दर्द को कम करने में सहायता होती है। मैट एक्सरसाइज को घर पर भी किया जा सकता है। ध्यान रहेकि इसे करतेसमय अपने पैर को ऊपर की ओर उठाते वक्त घुटने को न मोड़ें और कुछ देर पैर को उठा हुआ रहने दें। घुटने की चोट के​ लिए यह एक्सरसाइज काफी फादेमंद होती है।

लेकिन किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर से जांच घुटनों की जांच अवश्य करा लें, और इस विषय में सलाह लें कि आप ये एक्सरसाइज शुरू कर सकते हैं या नहीं।

 

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    इस जानकारी की सटीकता , समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेखक की नहीं है। इस लेख में उपलब्ध  सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकिस्तक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्येश्य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकिस्तक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। 
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Posted by D.R. Singh on Saturday 9 April 2016
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